मदर टेरेसा पर अंतर्राष्ट्रीय फिल्म बननी चाहिए : श्याम बेनेगल (साक्षात्कार)

लोनावला, 4 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी फिल्म की धारा को नई दिशा देने वाले प्रख्यात निर्देशक श्याम बेनेगल का मानना है कि गरीबों-वंचितों की आजीवन सेवा कर अमर हो चुकीं करुणा की प्रतिमूर्ति मदर टेरेसा के ‘असाधारण’ जीवन पर एक संपूर्ण अंतराष्ट्रीय फीचर फिल्म बननी चाहिए।

लोनावला, 4 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी फिल्म की धारा को नई दिशा देने वाले प्रख्यात निर्देशक श्याम बेनेगल का मानना है कि गरीबों-वंचितों की आजीवन सेवा कर अमर हो चुकीं करुणा की प्रतिमूर्ति मदर टेरेसा के ‘असाधारण’ जीवन पर एक संपूर्ण अंतराष्ट्रीय फीचर फिल्म बननी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त मदर टेरेसा को उनके 19वें स्मृति दिवस से एक दिन पहले चार सितंबर को ‘संत’ की उपाधि दी जाएगी।

पिछले वर्ष बंगाल सरकार ने 1929 में अल्बानिया से भारत आकर गरीबों की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर देने वाली मदर टेरेसा के जीवन पर फिल्म बनाने के लिए अपनी सहमति जताई थी।

लोनावला भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव (एलआईएफएफआई) के दौरान बेनेगल ने आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा, “मुझे मदर टेरेसा पर फिल्म बनाने का निमंत्रण किसी ने नहीं दिया है..हां, सुझाव मिले हैं, लेकिन अभी नहीं..जब मैं नेताजी सुभाषचंद्र बोस पर फिल्म बना रहा था, तब मुझे इसका सुझाव मिला था। मैं उस समय कोलकाता में था और मदर टेरेसा की संस्था से कुछ लोगों ने मुझसे मुलाकात की थी।”

फिल्म जगत के सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित 81 वर्षीय बेनेगल ने कहा कि मदर टेरेसा जैसी शख्सियत पर फिल्म बनाने के लिए काफी धन की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि यह एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर की फिल्म होगी।

बेनेगल ने कहा, “यह फिल्म सिर्फ भारतीय दर्शकों के लिए नहीं हो सकती, बल्कि दुनिया के विभिन्न संस्कृतियों, खासकर यूरोप और अमेरिका के लिए होनी चाहिए..इस तरह की फिल्म बनाने पर काफी खर्च आएगा।”

मदर टेरेसा पर हालांकि कुछेक वृत्तचित्र बन चुके हैं। इटली के निर्देशक फैब्रिजियो कोस्टा ने 2003 में ‘मदर टेरेसा ऑफ कलकत्ता’ नाम से एक वृत्तचित्र बनाई थी, जबकि 1987 में मदर टेरेसा पर बने एक वृत्तचित्र में प्रख्यात हॉलीवुड निर्देशक रिचर्ड एटनबरो ने अपनी आवाज दी थी। 1997 में ‘मदर टेरेसा : इन द नेम ऑफ गॉड्स पूअर’ नाम से एक डॉक्यूड्रामा रिलीज हुआ था।

दो साल पहले 2014 में ‘द लेटर्स’ नाम से आई फिल्म में मदर टेरेसा द्वारा अपने मित्र और आध्यात्मिक सलाहकार फादर सेलेस्टे वान एक्जेम को 50 वर्षो के अंतराल के बीच लिखे पत्रों के जरिए उनके जीवन के अहम क्षणों को उकेरने की कोशिश की गई थी।

लेकिन हिंदी फिल्म जगत में मदर टेरेसा के पूरे जीवन पर समग्र रूप से केंद्रित कोई फिल्म अब तक नहीं बनी है।

मदर टेरेसा पर खुद फिल्म बनाने के सावाल पर बेनेगल ने कहा, “इस समय तो इस पर कुछ कहना बहुत मुश्किल होगा, क्योंकि अभी मेरा दिमाग दूसरी दिशा में काम कर रहा है। लेकिन मदर टेरेसा का व्यक्तित्व बेहद आकर्षित करने वाला है। वह न सिर्फ एक आकर्षक व्यक्तित्व वाली महिला थीं, बल्कि उन्होंने एक असाधारण जीवन बिताया।”

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