‘मनरेगा के लिए आवंटन आवश्यकता से काफी कम’

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। गैर सरकारी संस्था, स्वराज अभियान ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि सरकार ने ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना 2016-17 के लिए महज 38,500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो वास्तविक आवश्यकता से काफी कम है। जबकि सरकार ने दावा किया था कि इसके लिए धन की कोई कमी नहीं है।

न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति एन. वी. रामन्ना की खंडपीठ को संस्था ने बताया कि सरकार के अपने आंकड़ों के मुताबिक, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में 217 करोड़ श्रम दिवस का प्रावधान है, जिसके लिए 71,820 करोड़ रुपये की जरूरत है, जबकि सरकार ने केवल 38,500 करोड़ रुपये का आवंटन किया है।

जबकि पिछले साल (2015-16) की अवैतनिक बकाया राशि भी 12,483 करोड़ रुपये है।

अदालत को बताया गया कि सरकार ने इस योजना में भी एक-तिहाई कटौती की है, जबकि इस साल राज्य सरकारों ने 314 करोड़ श्रम दिवस की मांग की थी।

स्वराज अभियान की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत से कहा कि साल 2016-17 में मनरेगा के लिए 38,500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिसमें से 12,483 करोड़ रुपये पिछले वित्त वर्ष का बकाया चुकाने में चला जाएगा और केवल 19,000 करोड़ रुपये बचेंगे।

अदालत एनजीओ द्वारा सूखा पीड़ित राज्यों में राहत की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

इस दौरान सरकार ने अदालत से कहा है कि सूखा प्रभावित इलाकों के किसान बैंकों से लिए गए कर्ज के पुर्नगठन या पुर्ननिर्धारण के हकदार हैं। साथ ही बताया कि देश के 12 राज्यों के 33 करोड़ लोग सूखे से प्रभावित हैं।

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