मनरेगा को कृषि कार्य से जोड़े केंद्र सरकार : तेलंगाना

हैदराबाद, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के कारण कृषि कार्यो में मजदूरों की कमी को लेकर तेलंगाना ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से अपील की कि वह इस योजना को कृषि कार्य से जोड़ दे।

हैदराबाद के बाहरी इलाके में स्थित कोमपल्ली में राज्य में सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के एक पूर्ण सत्र में इस आशय को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया गया।

प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा टीआरएस के अध्यक्ष के.चंद्रशेखर राव ने अपने उद्घाटन भाषण के दौरान प्रस्ताव पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि वह रविवार को नई दिल्ली में एक बैठक के दौरान नीति आयोग के समक्ष यह मुद्दा उठाएंगे।

राव ने कहा कि फसलों के मौसम में मनरेगा के कारण मजदूरों की कमी हो रही है, जिसकी वजह से किसानों को परेशानी हो रही है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजना लाभकारी साबित हुई है और अधिकांश मजदूरों को इससे काम मिला है, लेकिन दूसरी तरफ इसकी वजह से किसानों को फसलों के मौसम में मजदूर नहीं मिल पा रहे।

अगर मनरेगा को कृषि से जोड़ दिया जाए, तो इस योजना के तहत आने वाले मजदूरों का इस्तेमाल कृषि कार्य में हो सकता है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की)-केपीएमजी ने साल 2015 में एक रिपोर्ट में कहा था कि मनरेगा जैसी योजनाओं से कृषि मजदूरी प्रतिकूल तरीके से प्रभावित हुई है और इसका फसलों के उत्पादन तथा कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2006-07 के बाद से ग्रामीण वेतन में औसतन 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और इसने शहरी वेतन को भी पीछे छोड़ दिया है, लेकिन उत्पादकता जस की तस बनी हुई है।

पाया गया है कि साल 2004-05 तथा 2011-12 के दौरान कृषि मजदूरों की संख्या में 3.057 करोड़ की कमी आई है, जबकि कुल कार्यबल में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

इसी अवधि के दौरान, कृषि कार्यबल का हिस्सा 56.7 फीसदी से घटकर 48.8 फीसदी रह गया है।

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