भोपाल, 14 दिसंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के कृषि विभाग के अधीन संचालित कृषि प्रक्षेत्रों से सरकार को खर्च के मुकाबले कम आय हो रही है।
राज्य के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने यह खुलासा सोमवार को विधानसभा में कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में किया। राज्य में कृषि महोत्सव पर हुए खर्च पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों में जमकर नोक-झोंक भी हुई।
कांग्रेस विधायक रावत ने राज्य के 48 कृषि प्रक्षेत्रों को लेकर सवाल किया था कि इन प्रक्षेत्रों पर तीन वषरें में कुल कितनी राशि का व्यय किया गया और कितना लाभ हुआ। साथ ही कृषि महोत्सव के खर्च का भी ब्योरा मांगा था।
रावत के सवाल के जवाब में बिसेन ने बताया कि “प्रदेश में 48 सरकारी कृषि प्रक्षेत्र हैं। इन पर तीन वषरें में लगभग 11 करोड़ रुपये व्यय हुआ, मगर व्यय की तुलना में छह प्रक्षेत्रों में लाभ कम हो रहा है। घाटे में चलने के मुख्य कारण सिंचाई हेतु पानी की अत्यधिक कमी का होना, अल्पवर्षा, प्राकृतिक आपदा है। कम आय के लिए किसी को दोषी नहीं माना जा सकता।”
कृषि महोत्सव पर हुए खर्च का ब्योरा देते हुए बिसेन से बताया कि “वर्ष 2014-15 में 28 करोड़ रुपये और 2015-16 में लगभग 26 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। प्रदेश में कृषि महोत्सव आयोजन के दौरान ग्रामीण और विकासखण्ड स्तरीय संगोष्ठी, योजनाओं का प्रचार-प्रसार तथा जिला स्तरीय किसान मेलों का आयोजन किया गया। इस आयोजन के सार्थक नतीजे आए हैं।”
बिसेन के जवाब से कांग्रेस विधायक असंतुष्ट रहे और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब सरकारी कृषि प्रक्षेत्रों में ही खेती फायदे का धंधा नहीं बन पा रही है तो आम किसान का क्या हाल होगा, इसका सहजता से अनुमान लगाया जा सकता है। इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच नोंक-झोंक भी हुई।
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