मप्र के बजट में कोई नया कर नहीं (राउंडअप)

भोपाल, 1 मार्च (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश सरकार के वर्ष 2017-18 के बजट में कई योजनाओं के जरिए गांव, किसान, नौजवान, कर्मचारियों को लुभाने की कोशिश की गई है। इस बजट की खूबी यह रही कि किसी तरह का कर नहीं लगाया गया है।

वित्तमंत्री जयंत मलैया ने बुधवार को विधानसभा में एक लाख 69 हजार 954 करोड़ रुपये का बजट पेश करते हुए प्रस्तावित कई योजनाओं का ब्योरा दिया। इस बजट में 25 हजार 689 करेाड़ रुपये के घाटे का अनुमान जताया गया है जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 3.49 प्रतिशत है।

मलैया ने कहा कि राज्य सरकार का ध्येय है कि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिले और इसके लिए सेवा प्रदायकों अर्थात सरकारी सेवकों में संतोष और आनंद जरूरी है। इसके चलते शासकीय सेवकों को एक जनवरी, 2016 से सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाएगा। कर्मचारियों को नगद भुगतान जुलाई, 2017 से होगा।

वित्तमंत्री मलैया ने बजट पेश करते हुए कहा, “सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत दी जाने वाली पेंशन की राशि 150 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये की गई है। समाज में विधवाओं की आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति को देखते हुए पेंशन देने का निर्णय लिया गया है।”

बजट में मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए ‘मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना’ का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत 12वीं की परीक्षा में न्यूनतम 85 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं में दाखिला लेने वाले छात्रों की फीस राज्य सरकार द्वारा भरी जाएगी।

मलैया ने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्मशती वर्ष 2017 को गरीब कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसके तहत नगरीय क्षेत्र के अति गरीबों को सस्ते दर पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए राज्य के चुनिंदा नगरों में ‘दीनदयाल रसोई योजना’ शुरू की जा रही है।

राज्य में सिंचाई क्षमता में बढ़ोत्तरी का जिक्र करते हुए वर्ष 2017-18 के लिए सिंचाई परियोजनाओं में पूंजीगत मद में कुल बजट प्रावधान नौ हजार 850 करोड़ रुपये है जो कि वर्ष 2016-17 पुनरीक्षित अनुमान की तुलना में 1 हजार 237 करोड़ रुपये अधिक है।

किसानों के लिए दी जाने वाली सुविधाओं का जिक्र करते हुए मलैया ने बताया, “‘राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना’ की कमियों को दूर कर प्रारंभ की गई ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ राज्य के किसानों में अत्यंत लोकप्रिय रही है। अऋणी कृषकों को बीमा से जोड़ने के राज्य शासन के विशेष प्रयासों में सफलता मिली है और पिछले वर्ष के 27 हजार रुपये की तुलना में इस वर्ष लगभग सात लाख अऋणी कृषकों को बीमा से जोड़ा गया है।”

राज्य में नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए चल रहे नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा का जिक्र करते हुए मलैया ने बताया, “नदी के तट पर पूजन-हवन सामग्री के विसर्जन के लिए पृथक कुंड बनाए जा रहे हैं। नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए इससे लगी हुई भूमि पर वृक्षारोपण किया जाएगा। वन भूमि पर वृक्षारोपण के लिए 15 करोड़ रुपये, कृषि वानिकी के लिए 37 करोड़ रुपये तथा फलदार वृक्षारोपण के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है।”

उन्होंने कहा, “नदी में प्रदूषित जल को मिलने से रोकने के लिए नदी तट पर स्थित कस्बों में मल-जल शोधन संयत्र स्थापित करने के लिए पृथक प्रावधान किए गए हैं। चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।”

वित्तमंत्री ने कहा, “शहरी क्षेत्र के 11 तथा ग्रामीण क्षेत्र के 27 उप स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के रूप में प्रस्तावित है। राज्य शासन की पहल के कारण सभी जिला अस्पतालों में डायलिसिस तथा कीमोथैरिपी की सुविधा प्रारंभ की जा चुकी है।”

मलैया ने कहा, “शिक्षा के विस्तार एवं उसके स्तर में गुणात्मक सुधार के लिए राज्य शासन सतत प्रयासरत है। शालाओं में अध्यापकों के लगभग 36 हजार रिक्त पदों की पूर्ति के लिए भर्ती प्रारंभ की गई है। प्राथमिक शिक्षा अभियान के लिए तीन हजार 400 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के लिए 646 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है।”

कन्या शिक्षा को प्रोत्साहित करने की कोशिशों का जिक्र बजट में किया गया है। अनुसूचित जनजाति वर्ग की कक्षा 11 में ऐसी बालिकाएं, जिन्हें स्थानीय होने के कारण कक्षा नौ में साइकिल नहीं मिली थी और जो कक्षा 11वीं में निवास ग्राम से बाहर की उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्रवेश लेकर अध्ययन कर रही हैं, उन्हें नवीन साईकिल उपलब्ध कराई जाएगी।

शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े 201 विकासखंडों में कन्या छात्रावास भवनों के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था तथा मेस संचालन के लिए 48 करोड़ रुपये का प्रावधान है।

राज्य में सड़कों का जाल बिछाने का भी बजट में वादा किया गया है। गांवों को कस्बों से जोड़ने वाली ग्रामीण सड़कें कृषि उत्पादों के लिए बाजार तथा ग्रामीणों को सुविधायुक्त चिकित्सालयों की सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। इसलिए राज्य सरकार ने यह संकल्प लिया है कि प्रत्येक गांव को बारहमासी सड़क से जोड़ा जाए।

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