भोपाल, 21 मार्च (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के 51 में से 33 जिलों में पेयजल परिरक्षण अधिनियम (ड्रिंकिंग वॉटर कंजरवेशन एक्ट) लागू कर दिया गया है, इसके चलते जलस्रोतों के पानी का उपयोग पेयजल के अलावा किसी दूसरे काम में नहीं किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में सोमवार को प्रदेश में पेयजल संकट से निपटने की रणनीति बनाने के लिए हुई बैठक में यह जानकारी दी गई।
बैठक में मुख्यमंत्री चौहान ने अफसरों से कहा कि पेयजल समस्या के समाधान की युद्धस्तर पर व्यवस्था करें। प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मियों में पेयजल सुचारु रूप से मिलता रहे, यह सुनिश्चित करें।
बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि राज्य के 51 में से 33 जिलों में पेयजल के संभावित संकट को देखते हुए 33 जिलों में पेयजल परिरक्षण अधिनियम लागू कर दिया गया है। इस अधिनियम के लागू होने से किसी भी पेयजल-स्रोत के पानी का दीगर कार्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकेगा।
आशय साफ है कि पेयजल-स्रोत के पानी का उपयोग सिंचाई से लेकर अन्य कार्य में नहीं किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री चौहान ने बैठक में प्रदेश में पेयजल उपलब्धता की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में जलस्तर गिरने से हैंडपंप बंद हो गए हैं, वहां राइजर पाइप डालकर हैंडपंप चालू कराएं।
उन्होंने कहा कि सभी जिलों में पर्याप्त मात्रा में राइजर पाइप उपलब्ध रहें। ग्रामीण क्षेत्रों में नलजल योजनाएं चलती रहें, इसकी व्यवस्था की जाए। जहां जरूरत हो, वहां पेयजल गाड़ियों से पहुंचाने की व्यवस्था करें। पेयजल की स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग की जाए। बिगड़े हैंडपंपों के सुधार की भी लगातार निगरानी की जाए।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में स्थापित पांच लाख 16 हजार 57 हैंडपंप में से 4 लाख 93 हजार 260 हैंडपंप चालू हैं। जिलों में दो लाख 13 हजार 926 मीटर राइजर पाइप उपलब्ध हैं। जल संसाधन विभाग द्वारा ग्रामीण पेयजल निगरानी प्रणाली विकसित की गई है।
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