खरगौन, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के खरगौन जिले की सेंचुरी (यार्न व डेनिम) मिल के 300 मजदूरों को नौकरी से निकाले जाने और मिल को दूसरी कंपनी को बेचने से नाराज मिल कर्मचारियों ने बेमियादी धरना शुरू कर दिया है। नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि मुंबई-आगरा एक्सप्रेस हाईवे पर ग्राम मगरखेड़ी और निमरानी के बीच स्थित है सेंचुरी (यार्न व डेनिम) मिल। 25 सालों से यहां काम कर रहे लोगों की आजीविका का एक मात्र साधन यही मिल है। इस मिल में काम करने वाले मजदूरों को अपना भविष्य संकट में दिखने लगा है।
श्रमिकों ने बताया कि सेंचुरी यार्न व डेनिम जींस बेहतरीन उत्पादन करने वाली फैक्ट्री में 1200 श्रमिक कार्यरत हैं और पिछले कुछ सालों में अचानक इनके कागजात ‘फर्जी’ घोषित कर दिए गए, लगभग 300 मजदूरों को नौकरी से हटाया गया है। इसके खिलाफ आवाज उठाई तो प्रबंधन ने समझौता कर लिया, मगर किया कुछ नहीं।
श्रमिकों का कहना है कि इस फैक्ट्री को दूसरी कंपनी को बेच दिया गया है। वे किसी भी कीमत पर दूसरी कंपनी के अधीन काम करने को तैयार नहीं हैं। वे सिर्फ बिरला के साथ ही काम करना चाहते हैं।
धरना स्थल पर पहुंचीं मेधा पाटकर ने कहा, “आज देश में बड़ी कंपनियों की दादागीरी का आधार है राजनीतिक आशीर्वाद। बिरला समूह ने फैक्ट्री को गैरकानूनी प्रक्रिया के बेच दिया है। वेयरइट कंपनी मजदूरों को स्वीकार है या नहीं, यह तो पूछा ही नहीं गया।”
उन्होंने आगे कहा कि श्रमायुक्त के समक्ष दाखिल शिकायत पर भी निर्णय नहीं हुआ, तो मिल पर वेयरइट का बैनर कैसे टांगा गया? मजदूरों के संघर्ष को कानूनी और मैदानी स्तर पर लड़ेंगे।
श्रमिकों के मुताबिक, बिरला समूह ने 17 अगस्त की देर रात 2़ 30 बजे शासकीय अधिकारी, राजनीतिक नेता, मजदूर संगठनों की उपस्थिति में यह वक्तव्य निकाला कि ‘सेंचुरी मिल अपना कारोबार सुचारु रूप से चलाएगी, अगर लीज या बिक्री पर कंपनी किसी और को सौंपी गई, तो मजदूरों को वीआरएस (स्वैच्छिक निवृत्ति योजना) का लाभ दिया जाएगा।’
श्रमिकों का आरोप है कि इसके चंद दिनों बाद वेयरइट को सेंचुरी मिल बेच दी गई और वीआरएस को नकार दिया गया। मिल की बिक्री मजदूरों के साथ साफ-साफ धोखा है, जिससे आहत होकर सभी मजदूर एकजुट होकर अपनी लड़ाई संगठित रूप से आगे ले जाएंगे।
नर्मदा बचाओ आंदोलन की कमला यादव, मुकेश भगोरिया, मेधा पाटकर व नर्मदा घाटी के अन्य बांध प्रभावितों ने भी इस अन्याय के खिलाफ मजदूरों के संघर्ष का समर्थन किया। संजय चौहान, राजकुमार दुबे, व मजदूर संगठनों के कुछ नेताओं ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
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