मप्र : निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की काउंसिलिंग के लिए राज्य के विद्यार्थी ही पात्र

जबलपुर, 26 सितंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के जबलपुर उच्च न्यायालय ने निजी चिकित्सा महाविद्यालय की काउंसिलिंग में सिर्फ राज्य के निवासी विद्यार्थियों को ही शामिल करने का फैसला सुनाया है। साथ ही दूसरे राज्यों के विद्यार्थियों को काउंसिलिंग में शामिल किए जाने को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायूर्ति आर. एस. झा व न्यायमूर्ति सी. वी. सिरपुरकर की युगल पीठ ने असंवैधानिक करार दिया है।

राज्य के निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में अन्य प्रदेशों के विद्यार्थियों को दाखिला दिए जाने के संबंधों में प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए नियम को चुनौती देते हुए अभिनव दुबे ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिका में यह भी कहा गया था कि दूसरे प्रदेशों में सिर्फ स्थानीय विद्यार्थियों के प्रवेश का नियम है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आदित्य संघी ने कहा, “उनकी ओर से उच्च न्यायालय की युगलपीठ के समक्ष तर्क रखा गया कि देश के किसी अन्य प्रदेश में यह नियम लागू नहीं है कि दूसरे प्रदेश के विद्यार्थी निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में दाखिला ले सकें। राज्य में देश भर के विद्यार्थियों को दाखिला देने का नियम संविधान की धारा 14 में प्राप्त अधिकार का उल्लंघन है। इसलिए प्रदेश सरकार द्वारा बनाया गया यह नियम असंवैधानिक है।”

संघी के अनुसार, प्रदेश में संचालित निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में अन्य प्रदेश में विद्यार्थियों को दाखिला मिलेगा तो संबंधित राज्य के विद्यार्थियों का हक मारा जाएगा।

संघी के अनुसार, याचिका की सुनवाई के बाद सरकार के नियम को असंवैधानिक करार देते हुए युगलपीठ ने सिर्फ राज्य के ही विद्यार्थियों को काउंसिलिंग में शामिल होने का आदेश जारी किया है।

ज्ञात हो कि दुबे द्वारा पूर्व में दायर की गई याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदेश में निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की काउंसिलिग को ही निरस्त कर दिया था। इस याचिका में प्रदेश सरकार द्वारा प्राइवेट मेडिकल इंटर ग्रेजुएशन प्रवेश नियम 2016 को चुनौती दी गई थी। इस नियम के मुताबिक राज्य के निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए भारतीय नागरिक होना आवश्यक है। इस नियम के तहत अन्य प्रदेशों के विद्यार्थियों ने भी प्रदेश में संचालित निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में दाखिला लेने के लिए आवेदन किया था। पिछले दिनों प्रदेश के इन महाविद्यालयों की कुल 555 सीटों में से 500 सीटें अन्य प्रदेशों के विद्यार्थियों को काउंसिलिग के माध्यम से आवंटित की गई थीं।

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