रीवा, 27 जुलाई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में बजरंग दल के सदस्यों द्वारा धर्मातरण के आरोप में बंधक बनाकर पीटे गए पास्टर रामपाल कोरी और उनके साथी तो जेल में बंद हैं, लेकिन उन्हें पीटने वाले अभी भी खुले में घूम रहे हैं।
गौरतलब है कि पास्टर ईसाई समाज में पुजारी की पदवी है, जो स्थानीय स्तर प्रार्थनाएं एवं अन्य अनुष्ठान करवाते हैं और धर्म प्रचार में भी हिस्सा लेते हैं।
पुलिस ने बजरंगियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है, लेकिन अब तक गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
बजरंग दल के सदस्यों ने 21-22 जुलाई की रात पास्टर रामपाल कोरी और उनके साथ नंदलाल को अगवा कर लिया और पेड़ से बांधकर उनकी बेरहमी से पिटाई की।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें रिहा कराया था। बजरंगियों का आरोप था कि रामपाल धर्मातरण कराता है।
मउगंज के उप-मंडलाधिकारी (पुलिस) कमलेश शर्मा ने बुधवार को आईएएनस को बताया, “22 जुलाई को सरकारी स्कूल में शिक्षक रामनगरी के रहने वाले संतराम साकेत ने रामपाल और नंदलाल के खिलाफ धर्मातरण के लिए दवाब डालने की शिकायत की। जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों इस समय जेल में हैं।”
शर्मा के अनुसार, “रामपाल व नंदलाल बंधक बनाकर मारपीट करने वाले बजरंग दल के 12 सदस्यों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया गया है, लेकिन उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।”
रामलाल और नंदलाल के परिचित और इसी इलाके में पास्टर रामयश ने बुधवार को आईएएनएस को बताया, “रामपाल व नंदलाल को बंधक बनाकर मारपीट करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर रही है।”
उल्लेखनीय है कि पास्टर रामलाल कोरी मउगंज में नंदलाल के घर पर प्रार्थना आदि कराते रहे हैं। बीते गुरुवार की रात नंदलाल के ससुर के निधन की खबर पाकर रामपाल व नंदलाल मोटरसाइकिल से शाहपुर थाना क्षेत्र के गडरा गांव गए हुए थे। तभी बजरंग दल से जुड़े लोग वहां आ गए और उनसे मारपीट करने लगे।
बजरंग दल के कार्यकर्ता उन्हें घसीटते हुए जंगल की ओर ले गए, मारपीट की और पेड़ से बांध दिया। देर रात जब उनकी पत्नी ने पुलिस को अपहरण की सूचना दी, तब पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों को छुड़ाया।
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