भोपाल, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को उपज का सही दाम दिलाने के मकसद से ‘भावांतर योजना’ शुरू की है, मगर किसानों के लिए यह योजना नई मुसीबत बन गई है। व्यापारी किसानों को नकद पैसे नहीं दे रहे हैं और फसल भी कम दाम पर ले रहे हैं। मुसीबत झेल रहे किसानों ने गुरुवार को राज्य की कई मंडियों में हंगामा किया। इस दौरान तीन किसान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महामंत्री अनिल यादव का कहना है, “जिस दिन से भावांतर योजना लागू हुई है, उसी दिन से व्यापारी कम दर पर सोयाबीन खरीद रहे हैं, पहले 3000 रुपये प्रति क्विंटल खरीद रहे थे और अब 2100 रुपये प्रति क्विंटल। इस पर किसानों ने नाराजगी जताई। इसके चलते तीन किसान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।”
राज्य सरकार ने किसानों को पायलट परियोजना के तौर पर दलहन व तिलहन फसलों का बेहतर दाम किसानों को दिलाने के लिए ‘भावांतर योजना’ तैयार की है। इस योजना में प्रावधान है कि अगर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से खरीदी होगी, तो खरीदी दर और समर्थन मूल्य के अंतर को सरकार किसान के खाते में जमा करेगी। मगर योजना का लाभ किसानों को मिल नहीं रहा है।
किसान गुरुवार सुबह भोपाल की करौंद मंडी में सोयाबीन बेचने पहुंच गए थे। पहले तो उन्हें दाम कम दिए गए, फिर नकद देने पर कमीशन काटा गया। सरकार ने किसानों को 50 हजार नकद देने का ऐलान किया है, मगर एक भी किसान ऐसा नहीं है, जिसे इतनी राशि नकद मिली हो। गुस्साए किसानों ने मंडी के गेट पर चूड़ियां लटका दीं और नारेबाजी की। पुलिस ने अनिल यादव सहित तीन किसान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।
राज्य के अन्य हिस्सों से भी इसी तरह की शिकायतें आ रही हैं। राज्य के कृषि मंत्री बिसेन ने संवाददाताओं से चर्चा के दौरान माना कि व्यापारी से किसानों को उपज के सही दाम नहीं मिल रहे हैं, इस तरह की शिकायतें उन तक भी आई हैं।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा, “50 करोड़ रुपये खर्च कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिस योजना का डिंढोरा पीटा, वहीं भावांतर योजना अब किसानों के लिए जानलेवा बन गई। जिस तरह नोटबंदी और जीएसटी का फैसला बगैर सोचे-समझे लिया गया था, ठीक उसी तरह मुख्यमंत्री भावांतर योजना प्रदेश में लागू करके अमेरिका यात्रा पर चले गए।”
सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की किसानों से 50 हजार रुपये नकदी भुगतान करने की बात एक बार फिर झूठी साबित हुई। किसान एक बार फिर ठगा हुआ महसूस कर रहा है। मुख्यमंत्री भावांतर योजना वापस लें और किसानों की फसल समर्थन मूल्य पर खरीदने की घोषणा करें।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद कमलनाथ ने भी ट्वीट कर मुख्यमंत्री शिवराज से कहा कि वे जिद छोड़ें और भावांतर योजना की फिर से समीक्षा करें।
उन्होंने कहा कि पूर्व की तरह ही समर्थन मूल्य पर किसानों की उपज खरीदी जाए, समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए। नई योजना और शिवराज के झूठ से राज्य की मंडियों में अराजकता फैल गई है।
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