जबलपुर, 13 सितंबर (आईएएनएस)। कहते हैं न कि भ्रष्टाचार की कमाई का जो भी उपभोग करता है, उसे भी सजा मिलती है, इसका उदाहरण जबलपुर में सामने आया है। लोकायुक्त के विशेष न्यायाधीश अक्षय द्विवेदी ने लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन अधीक्षण यंत्री (सुपरिटेंडिंग इंजीनियर) के दो बेटों को 30-30 लाख रुपये के जुर्माना और चार-चार साल कैद की सजा सुनाई है। मामला 17 साल से लंबित था, तत्कालीन अधीक्षण यंत्री का निधन हो चुका है।
लोकायुक्त के सहायक अभियोजक प्रभात शुक्ला ने गुरुवार को बताया कि लोकायुक्त की टीम ने 22 नवंबर, 1995 में सागर में पदस्थ पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन अधीक्षण यंत्री गया प्रसाद पाठक के शासकीय निवास व कार्यालय और जबलपुर के राइट टाउन स्थित निजी निवास में दबिश दी थी। अधीक्षण यंत्री के पास से लगभग 60 लाख 79 हजार रुपये की संपत्ति (आय से अधिक) मिली थी। इसके अलावा लगभग 22 लाख रुपये नगद बरामद हुए थे।
लोकायुक्त ने जांच में पाया था कि अधीक्षण यंत्री ने भ्रष्टाचार की कमाई से अपने बेटों के लिए प्लास्टिक की फैक्टरी व इन्वेस्टमेंट एवं फाइनेंशियल कंपनी खोलने में खर्च की है। इसके अलावा नरसिंहपुर में भी उन्होंने बेटों के नाम पर जमीन खरीदी थी। पुलिस ने अधीक्षण यंत्री के बेटे प्रशांत पाठक तथा पंकज पाठक को भी अभियुक्त बनाया था।
शुक्ला के मुताबिक, लोकायुक्त की टीम ने जांच के बाद न्यायालय के समक्ष चालान पेश किया था। प्रकरण की सुनवाई के दौरान वर्ष 2011 में गया प्रसाद पाठक की मौत हो गई थी। प्रकरण की सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्य व गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी दोनों भाइयों को दंडित किया है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि अज्ञात स्रोत से अर्जित धन मुख्य अभियुक्त ने अपने बेटों के नाम पर निवेश किया, जिसका लाभ मुख्य अभियुक्त के साथ उन्होंने भी प्राप्त किया है, इसलिए वह दोषी है। न्यायालय ने दबिश के दौरान बरामद 22 लाख रुपये की राशि राजसात करने के आदेश दिए हैं।
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