भोपाल, 23 जनवरी (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति और जनजाति के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षण संस्थाओं की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग दी जाएगी। इसके लिए कोचिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह ऐलान सोमवार को किया।
राज्य स्तरीय नेतृत्व विकास शिविर को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सबसे पिछड़े और गरीब, राज्य सरकार की प्राथमिकता में सबसे पहले हैं, यही कारण है कि राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए नि:शुल्क किताबें, छात्रवृत्ति, नि:शुल्क साइकिल, छात्रावास सहित सभी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं। इन वर्गों के विद्यार्थियों को कक्षा 12वीं में 75 प्रतिशत अंक लाने पर लैपटॉप तथा महाविद्यालय में प्रवेश लेने पर स्मार्ट फोन दिए जाएंगे।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से आईआईटी, आईआईएम, नेशनल लॉ कॉलेज और मेडिकल जैसी परीक्षाओं में चयन होने पर इन वर्गों के विद्यार्थियों की फीस राज्य सरकार भरेगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री चौहान ने मेधावी विद्यार्थियों को रानी दुर्गावती, शंकर शाह एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर पुरस्कार वितरित किए। विशेष पिछड़ी जातियों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों में से तीन को प्रतीक स्वरूप मोबाइल टैब दिया गया।
आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग द्वारा 23 से 29 जनवरी तक नेतृत्व विकास शिविर लगाया जा रहा है। इसमें प्रदेश के सभी जिलों से अनुसूचित जाति, जनजाति और विशेष पिछड़ी जनजाति के कुल 234 मेधावी विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं।
इस मौके पर वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार व अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री ज्ञान सिंह ने राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए किए जा रहे प्रयासों व योजनाओं का ब्यौरा दिया।
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