मप्र : शिवराज के मंच के सामने उपवास पर बैठे किसान (राउंडअप)

भोपाल, 10 जून (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश में शांति बहाली और किसानों की समस्याएं निपटाने के लिए शनिवार से भेल के दशहरा मैदान में अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने किसानों ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। कर्ज माफी का आश्वासन न मिलने से नाराज किसानों ने भी मंच के सामने उपवास शुरू कर दिया है।

दशहरा मैदान में अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे मुख्यमंत्री चौहान ने किसानों को चर्चा के लिए आमंत्रित किया था। उन्होंने दिनभर विभिन्न संगठनों से मुलाकात की। लेकिन जब सात किसान संगठनों ने कर्ज माफी की बात की तो चौहान ने उस पर सहमति नहीं जताई। इसके बाद नाराज किसानों ने शिवराज के मंच के सामने उपवास शुरू कर दिया।

आम किसान यूनियन के केदार सिरोही ने आईएएनएस से कहा, “मुख्यमंत्री ने कर्ज माफी की मांग मानने से इंकार कर दिया है, लिहाजा मैंने और अन्य किसानों ने उसी पंडाल में उपवास शुरू कर दिया है। यह उपवास बनाम उपवास है। यह तब तक चलेगा, जब तक मुख्यमंत्री मांग मान नहीं लेते हैं। वह महज नौटंकी कर रहे हैं और किसानों की समस्या से उनका कोई वास्ता नहीं है।”

सिरोही के अनुसार, “सात संगठनों आम किसान यूनियन, भारतीय किसान यूनियन, राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ, अखिल भारतीय किसान महासंघ, किसान सेवा संगठन, किसान सेना (विदिशा), किसान जागृति मंच के प्रतिनिधि उपवास पर बैठे हैं और रविवार को प्रदेशभर से किसान यहां पहुंचकर उसी पंडाल में उपवास करेंगे, जिसमें मुख्यमंत्री कर रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने किसानों से उपवास न करने का आग्रह किया, मगर उन्होंने एक न सुनी। किसान अपनी जिद पर अड़े हैं। मुख्यमंत्री और अन्य नेता मंच से जा चुके हैं। मुख्यमंत्री मंच के पीछे बने कक्ष में ही रात गुजारेंगे और रविवार सुबह 11 बजे मंच पर आएंगे।

राज्य में किसान एक जून से कर्ज माफी और फसल की उचित कीमत की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। शनिवार आंदोलन का अंतिम दिन था। इससे पहले कई स्थानों पर हिंसा हुई और मंदसौर में पुलिस गोलीबारी में छह किसानों की जान चली गई। मुख्यमंत्री ने राज्य में शांति स्थापना और किसानों से चर्चा के लिए भेल के दशहरा मैदान में शनिवार से उपवास शुरू किया। उनके साथ पत्नी साधना सिंह भी उपवास पर हैं।

शिवराज ने सुबह उपवास शुरू करने के साथ कहा था, “राज्य सरकार ने बीते वर्षो में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। किसानों को शून्य प्रतिशत पर कर्ज और खाद व बीज के लिए एक लाख रुपये का कर्ज लेने पर 90 हजार रुपये जमा करने का प्रावधान किया गया है।”

उपवास के दौरान मुख्यमंत्री चौहान ने कहा, “जब भी किसानों पर विपदा आई वे उनके साथ रहे। सोयाबीन की फसल को नुकसान होने पर 4,800 करोड़ रुपये की राशि बांटी गई, वहीं बीमा की 4,400 करोड़ रुपये की राशि किसानों को दी गई। बीते वर्ष सरकार ने प्याज की बंपर पैदावार पर छह रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्याज खरीदी और इस बार आठ रुपये प्रति किलोग्राम प्याज खरीद रहे हैं। तुअर और मूंग के लिए समर्थन मूल्य तय कर दिया है।”

चौहान ने प्रदेश में हिंसा पर चिंता जताई और कहा, “किसानों से चर्चा के लिए उनके दरवाजे खुले हुए हैं। वह दशहरा मैदान में इसीलिए बैठे हैं, क्योंकि वे किसान के दर्द को समझते हैं। किसान की हर संभव मदद की जाएगी, फैसले लिए जाएंगे और जरूरत पड़ी तो वह किसानों के लिए जिंदगी तक दे देंगे।”

ज्ञात हो कि राज्य के किसान कर्ज माफी और फसल के उचित दाम की मांग को लेकर एक जून से आंदोलनरत हैं। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, शनिवार आंदोलन का अंतिम दिन था, लेकिन उपवास के साथ किसानों ने शनिवार को इसे अनिश्चितकालीन बना दिया।

बीते नौ दिनों के दौरान मालवा निमाड़ क्षेत्र में हिंसा और आगजनी हुई, मंदसौर में पुलिस गोलीबारी में छह किसानों की मौत हो गई। वहां कर्फ्यू लगाना पड़ा। आंदोलन की आग शुक्रवार को भोपाल तक पहुंच गई।

मुख्यमंत्री चौहान ने इस बीच, दशहरा मैदान में अपनी कैबिनेट और संगठन के नेताओं से चर्चा की। यहां मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी ने चौहान का तिलक कर उन्हें शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री चौहान जहां एक ओर किसानों से चर्चा और शांति बहाली के लिए उपवास पर बैठे हैं, वहीं राज्य के कृषि मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने कहा कि किसानों के कर्ज माफ नहीं किए जाएंगे। बिसेन ने संवाददाताओं से शनिवार को कहा, “मध्यप्रदेश में किसानों के कर्ज माफ करने का कोई औचित्य नहीं बनता है, क्योंकि उनसे हम मूलधन (कर्ज) से 10 प्रतिशत कम ले रहे हैं। जब हमने किसान पर ब्याज नहीं लगने दिया तो कर्ज किस बात का माफ होगा।”

उपवास के दौरान सरकार का कामकाज बल्लभ भवन के बदले दशहरा मैदान से चलता रहा, इसके लिए दशहरा मैदान में अस्थाई मुख्यमंत्री निवास व सभा कक्ष बनाया गया है। भारी सुरक्षा बल की तैनाती की गई है। चौहान के साथ प्रमुख सचिव, कैबिनेट के अधिकांश मंत्री उपवास स्थल पर मौजूद रहे।

विपक्ष ने मुख्यमंत्री के उपवास और दशहरा मैदान से सरकार चलाने के फैसले को नौटंकी करार दिया है। कांग्रेस ने कहा है कि चौहान को नौटंकी करने के बजाय किसानों की समस्याओं का निराकरण करना चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने कहा, “खुद को संवेदनशील मुख्यमंत्री बताने वाले चौहान छह किसानों की मौत के बाद न तो मंदसौर गए और न ही उन्होंने बालाघाट में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में 25 लोगों की मौत के बाद वहां गए। वह सिर्फ नौटंकी कर लोगों का ध्यान असल मुद्दे से भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।”

वहीं नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने सरकार को अक्षम करार देते हुए राज्यपाल से राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। शनिवार को भी छिटपुट प्रदर्शन हुए, मगर कहीं से बड़ी हिंसा की खबर नहीं है।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493