नाईक ने कहा कि महाराणा प्रताप का नाम भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा है। महाराणा प्रताप वीरता, अदम्य, साहस और स्वाभिमान के प्रतीक हैं। वे युद्ध नीति में निपुण थे और उन्होंने किसी के आगे कभी सिर नहीं झुकाया।
वे जीवन र्पयत अपनी मातृभूमि मेवाड़ की रक्षा के लिए अडिग रहे। राजस्थान के महाराणा प्रताप और महाराष्ट्र के छत्रपति शिवाजी महाराज ने मातृभूमि की रक्षा के लिए स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का संघर्षमय जीवन विषम एवं विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने की प्रेरणा प्रदान करता है।
राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि महाराणा प्रताप का व्यवहार और युद्धनीति देश के लिए आदर्श के रूप में है। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि वे महापुरुषों की जयंती व पुण्यतिथि के अवसर पर उनके विचारों का आत्मसात करने के साथ व अपने देश एवं प्रदेश के विकास के लिये संकल्प लें।
राज्यपाल ने महाराणा प्रताप की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित किए जाने की क्षत्रिय समाज के लोगों की मांग पर कहा कि यदि वे लिखित तौर पर उन्हें कोई प्रत्यावेदन देंगे तो वे निश्चित रूप से अपने स्तर से इस मसले पर केंद्र सरकार से विचार विमर्श करेंगे।
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