मुंबई, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। राज्य में सत्ताधारी भाजपा-शिव सेना सरकार द्वारा किसानों की पूर्ण कृषि ऋण माफी की घोषणा न किए जाने से नाराज सभी प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने अपनी मांग के पक्ष में दूसरी संघर्ष यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया है।
महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सुधीर धोने ने शनिवार को कहा कि दूसरी संघर्ष यात्रा 15 अप्रैल से शुरू होगी। पहली सप्ताह भर लंबी संघर्ष यात्रा महाराष्ट्र के पूर्वी हिस्सों और मराठवाड़ा में पिछले सप्ताह आयोजित हुई थी।
धोने ने कहा, “यह निर्णय कांग्रेस, राष्ट्रावादी कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी, पीडब्ल्यूपी, पीआरपी और अन्य सहित विभिन्न पार्टियों की एक संयुक्त बैठक में लिया गया, जिसमें नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्ण विखे-पाटील उपस्थित थे।”
उन्होंने कहा कि चूंकि विपक्ष पिछले महीने राज्य बजट में किसानों की ऋण माफी के लिए संघर्ष कर रहा था, इस लिए सत्ताधारी पार्टी ने 19 विपक्षी विधायकों को निलंबित कर दिया, जिसके बाद पूरे विपक्ष ने विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।
उन्होंने कहा, “सरकार ने विधानसभा में न्याय नहीं किया, इसलिए हमने इस मुद्दे को संघर्ष यात्रा के जरिए जनता की अदालत में ले जाने का निर्णय लिया है।”
यह 15 अप्रैल को बुलढाणा के सिंधखेदराजा से शुरू होगी और जलगांव, धुले, नंदूरबार, नाशिक और पालघर जैसे जिलों से गुजरेगी और 18 अप्रैल को संपन्न होगी।
धोने ने कहा कि जब तक राज्य सरकार किसानों के सभी कृषि ऋण माफ करने का निर्णय नहीं ले लेती, विपक्षी दलों का आंदोलन जारी रहेगा।
विपक्षी दलों और शिव सेना ने मांग की है कि यदि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना चुनावी वादा पूरा कर सकते हैं और कृषि ऋण माफी पैकेज की घोषणा कर सकते हैं तो महाराष्ट्र ऐसा क्यों नहीं कर सकता।
हालांकि, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बार-बार कहा है कि सरकार किसानों को राहत देने के लिए बचनबद्ध है और इसे लागू करने से पहले उत्तर प्रदेश ऋण माफी मॉडल का अध्ययन करने का आदेश दिया गया है।
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