मुंबई, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। एक तरफ महाराष्ट्र लगातार सूखे से जूझ रहा है, दूसरी तरफ ग्रीनपीस की एक रिपोर्ट में यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि अकेले महाराष्ट्र में कोयला पावर प्लांट्स इतनी अधिक मात्रा में पानी का खपत करता है जो हर साल लगभग सवा करोड़ लोगों के लिए पर्याप्त है।
वर्तमान में, महाराष्ट्र के पास 16,500 मेगावाट क्षमता के कोयला से पैदा होने वाली बिजली है। इनमें से लगभग 13000 मेगावाट महाराष्ट्र के उन इलाकों में स्थित हैं जहां पहले से ही पानी का संकट है। ये प्लांट अभी 20.18 लीख क्यूबिक मीटर पानी खपत कर रहे हैं।
दूसरी तरफ बिजली पैदा करने के लिए 37,370 मेगावाट वाले कोयला पावर प्लांट को लगाए जाने की योजना प्रस्तावित है। ग्रीनपीस का कहना है कि इस योजना से कोयला प्लांट द्वारा पानी की मौजूदा खपत दोगुना हो जाएगा तथा जल संकट और अधिक गहरा जाएगा।
ग्रीनपीस इंडिया के सीनियर कैम्पेनर जय कृष्णा ने कहा, “पानी की कमी एक अनिवार्य सच है। इससे कृषि पर गंभीर संकट पैदा हो गया है। इससे देश भर के लोगों का आजीविका और जीवन दोनों खतरे में पड़ गया है। एक तरफ पानी को बचाए जाने का उपाय करना जरूरी तो है ही, उससे भी बड़ा सवाल यह है कि मौजूदा पानी का किस तरह इस्तेमाल हो।”
फिलहाल भारी मात्रा में पानी तापीय ऊर्जा संयंत्रों को दिया जा रहा है। ग्रीनपीस की रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रस्तावित तापीय ऊर्जा की बड़ी परियोजनाओं की वजह से आने वाले समय में भारी मात्रा में पानी की जरूरत होगी। अगर प्रस्तावित संयंत्रों और वर्तमान में निर्माणाधीन संयंत्र को देखें तो स्पष्ट है कि महाराष्ट्र का करीब 49 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी इन प्लांटों में चला जाएगा। अनुमान है कि इतना पानी करीब 2.6 करोड़ लोगों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।
जय कृष्णा ने कहा, “सरकार को कोयले की वास्तविक लागत की गणना के वक्त पानी के अभाव को भी जोड़ने की जरूरत है। स्पष्ट है कि लगातार कोयला पावर प्लांट पर बढ़ रही निर्भरता राज्य के किसानों और निवासियों के लिए विनाशकारी साबित होगा।”
इस साल गर्मी के पहले से केपीसीएच का रायचुर पावर प्लांट और एनटीपीसी फरक्का पावर प्लांट को पानी के अभाव में तात्कालीक रूप से बंद कर दिया गया है। महागेंसो परली पावर प्लांट जुलाई, 2015 से ही पानी के अभाव में बंद है।
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