नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि देश में समुद्री मात्स्यिकी में मौजूदा असंतुलन दूर करने में, इसका सर्वागीण विकास सुनिश्चित करने में तथा इससे जुड़े लाखों मछुआरों की आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति में प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय समुद्री मात्स्यिकी नीति 2016’ अहम मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।
कृषि मंत्री ने यह बात शुक्रवार को कृषि मंत्रालय में तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मत्स्य पालन मंत्रियों के साथ ‘राष्ट्रीय समुद्री मात्स्यिकी नीति 2016’ पर हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद कही।
उन्होंने कहा कि तट से दूर गहरे समुद्र में मौजूदा समुद्री संसाधनों के बेहतर उपयोग और लाखों मछुआरों की आजीविका को सुगम बनाने के लिए जरूरी है कि केंद्र और तटीय राज्य सरकारें मिलकर ‘राष्ट्रीय समुद्री मात्स्यिकी नीति’ पर पूरी गंभीरता के साथ अमल करें।
कृषि मंत्री ने कहा, “‘मात्स्यिकी’ मूल रूप से राज्य-सरकार का विषय है। अंत:स्थलीय मात्स्यिकी तथा 12 समुद्री-मील तक का क्षेत्र पूर्णरूप से राज्यों के ही अधीन आता है, जबकि 12 समुद्री-मील से परे, 200 समुद्री-मील तक का ‘ई.ई.जेड’ का क्षेत्र ही केंद्र सरकार के अंतर्गत आता है।”
उन्होंने कहा, “समुद्री-मात्स्यिकी में 0 से 200 समुद्री-मील तक के संपूर्ण क्षेत्र के विकास को दिशा देने के मकसद से, वर्तमान में लागू ‘व्यापक समुद्री मात्स्यिकी नीति’ को वर्ष 2004 में जारी किया गया था। इस नीति के तहत तटवर्ती राज्यों और केंद्र, दोनों को मिल कर, देश मे ‘समुद्री-मात्स्यिकी’ के विकास के प्रयास करने थे। चूंकि इस नीति को जारी किए 10 वर्ष से अधिक का समय बीत गया था, इसलिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समुद्री मात्स्यिकी सेक्टर के बदलते परिप्रेक्ष्य में देश की ‘समुद्री मात्स्यिकी नीति’ की समीक्षा आवश्यक थी।”
कृषि मंत्री ने कहा, “देश में निकटवर्ती समुद्री संसाधनों का पिछले दो-तीन दशकों में अधिक दोहन हुआ है। यह सिलसिला अगर इसी प्रकार से जारी रहा तो आने वाले कुछ वर्षो मे समुद्री आजीविका पर संकट आ सकता है।”
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