मादक पदार्थो पर निर्भरता घटाता है योग : अध्ययन

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। आयुष मंत्रालय द्वारा अधिकृत हाल के एक अध्ययन से जाहिर हुआ है कि योग की मदद से मादक पदार्थो का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय रूप से बेहतरी लाना और मादक पदार्थो के उपयोग की उनकी बारंबारता में कमी लाना संभव है।

यह अध्ययन इस वर्ष नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में किया गया तथा इसे आयुष मंत्रालय की एक्सट्रा मुराल रिसर्च (ईएमआर) योजना के तहत वित्त पोषित किया गया।

अध्ययन में मादक पदार्थो के व्यसनी व्यक्तियों, खासकर हेरोइन का उपयोग करने वालों के एक समूह के बीच सुदर्शन क्रिया योग (एसकेवाई) और ध्यान को नियमित उपचार के साथ उपयोग में लाया गया।

नई दिल्ली के राष्ट्रीय मादक पदार्थ निर्भरता उपचार केंद्र (एनडीडीटीसी) के एक समुदाय आधारित क्लीनिक में वर्तमान में 84 नशेड़ियों अर्थात हेरोइन का उपयोग करने वालों का उपचार किया जा रहा है। इन व्यक्तियों को भी अध्ययन में शामिल किया गया। नियंत्रण समूहों के साथ यह एक आकस्मिक अध्ययन था।

नियंत्रण समूह को मानक उपचार और मनोवैज्ञानिक उपचार दिया गया, जबकि अध्ययन समूहों को मानक उपचार के साथ एक कार्यशाला प्रणाली में तीन दिनों तक एसकेवाई कार्यक्रम के साथ जोड़ दिया गया और उन्हें प्रतिदिन घर पर इस तकनीक का अभ्यास करने को भी प्रोत्साहित किया गया। इसे साप्ताहिक रूप से आगे की एसकेवाई कार्यक्रम की कार्यवाही में भाग लेने की भी सलाह दी गई।

मानक संवीक्षा उपाय (मूत्र संवीक्षा) भी अपनाया गया और पाया गया कि हेरोइन का उपयोग करने वाले नियंत्रण समूह की तुलना में उन उपयोगकर्ताओं के समूह में राहत का प्रतिशत उच्च था जिनका सुदर्शन क्रिया योग (एसकेवाई) और ध्यान के साथ मानक उपचार किया गया था।

कुल मिलाकर अध्ययन पता चला कि योग के अभ्यास से मादक पदार्थो का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के शारीरिक, सामाजिक संबंधों और जीवन स्तर के पर्यावरण क्षेत्रों में उल्लेखनीय रूप से बेहतरी आ जाती है और मादक द्रव्यों के उपयोग की उनकी बारंबारता में भी कमी आती है।

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