मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए समयबद्ध कार्यक्रम हो : कोविंद

नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए समयबद्ध कार्यक्रम की आवश्यक बताई है।

देश की राजधानी दिल्ली में गुरुवार को 21वीं वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ मेंटल हेल्थ के उद्घाटन के मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में जितनी जल्दी संभव हो रोगों की पहचान और उसका उपचार करने के लिए समयबद्ध कार्यक्रम होना चाहिए।

इस मौके पर उन्होंने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2016 का जिक्र किया और कहा कि भारत की 14 फीसदी आबादी को सक्रिय मानसिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप की जरूरत है। तकरीबन दो फीसदी लोग गंभीर मानसिक विकार से पीड़ित हैं और देश में लगभग दो लाख हर साल खुदकुशी कर लेते हैं। अगर आत्महत्या के प्रयास के मामले को शामिल करें तो यह आंकड़ा काफी ज्यादा हो जाता है।

राष्ट्रपति ने मानसिक स्वास्थ्य के आंकड़ों को चिंताजनक बताया और कहा कि महानगरों में निवास करने वाले चाहे उत्पादक आयु समूह के लोग हों या फिर बच्चे व किशोर, सभी मानसिक रोगों के खतरे की जद में हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे देश में युवाओं की आबादी 65 फीसदी है जिसमें 35 वर्ष से कम उम्र के लोग शामिल हैं और हमारा समाज तेजी से शहरीकरण के प्रति उन्मुख है। यह हमें मानसिक स्वास्थ्य के एक महामारी का रूप लेने की संभावना का संकेत दे रहा है।

राष्ट्रपति ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए ज्यादा से ज्यादा मानवीय संसाधनों की आवश्यकता बताई और कहा कि भारत की आबादी सवा अरब है लेकिन यहां डॉक्टर महज सात लाख हैं।

राष्ट्रपति ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में डॉक्टरों की भारी कमी है। देश में सिर्फ 5,000 मनोचिकित्सक और 2,000 से भी कम नैदानिक मनोवैज्ञानिक हैं।

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