मानसून है बच्चों को डी-वॉर्मिग की गोली देने का वक्त

नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। मानसून में जमीन में रहने वाले ज्यादातर कीड़े सतह पर आ जाते हैं और सब्जियों को प्रदूषित करते हैं। बारिश की वजह से होने वाली नमी में मक्खियां-मच्छर पनपते हैं।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मानद महासचिव पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया कि यह इसलिए जरूरी है कि सभी फल और सब्जियां साफ पानी के साथ अच्छे से धोए जाएं और अगर जरूरत हो तो बीमारी से बचने के लिए पोटाशियम परमेंगनेट का प्रयोग किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि गोल कीड़े अक्सर जमीन में मौजूद होते हैं। उनके मल से होने वाले प्रदूषण से बचने के लिए बेहतर साफ सफाई की बेहद आवश्यकता होती है, जो कि मानसून में लगभग असंभव होती है।

खाने से पहले अच्छी तरह से हाथ धोना और उबला हुआ पानी पीने से गोल कीड़े के संक्रमण से बचा जा सकता है, लेकिन भारतीय माहौल में यह संभव नहीं हो सकता है।

इससे बचने का सबसे आसान तरीका है बच्चे को साल में तीन से चार बार डी-वॉर्मिग गोलियां देना। स्कूल जाने वाले बच्चों को तीन से चार महीनों में डी-वॉर्मिग गोली की एक खुराक देने की सलाह कई देशों में दी जाती है।

एक अध्ययन में पाया गया कि मेबनडाजोल गोली साल में तीन बार देने से गोल कीड़े के संक्रमण में 97 प्रतिशत तक कमी आई।

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