मालेगांव जांच में प्रधानमंत्री कार्यालय कर रहा हस्तक्षेप : कांग्रेस (लीड-1)

नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि वर्ष 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े आरोपियों को ‘क्लीन चिट’ दिलाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) हस्तक्षेप कर रहा है और इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी शामिल हैं।

कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय से गुजारिश की है कि वह इस मामले की जांच अपने हाथ में ले और इससे जुड़ी तमाम फाइलें, आरोपपत्र, नोटिंग और दूसरे संबंधित दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले ले, ताकि न्याय सुनिश्चित हो।

कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में कहा, “यह सरकार कानून और न्याय की प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय में एक केंद्रीय तौर पर समन्वित गंदी चाल चलने वाला विभाग है, जिसकी देखरेख राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल करते हैं।”

एनआईए ने शुक्रवार को इस मामले में 10 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था और मालेगांव मामले में आरोपियों की सूची से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और पांच अन्य के नाम निकाल दिए थे।

सभी आरोपियों पर से कड़े कानून मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट) के चार्ज हटा लिए गए, जिनमें लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित का नाम भी शामिल है।

कांग्रेस का सवाल है कि आरोपियों ने अपने बयान में जब अपराध स्वीकार कर लिए थे, तब उन पर मकोका लगाया गया था। ऐसे में इन्हें क्लीन चिट किस आधार पर दिया गया, यह समझ से परे है।

आनंद शर्मा ने कहा, “एनआईए अब ‘नमो इन्वेस्टिगेशन एजेंसी’ बन गई है और इसका एकमात्र उद्देश्य संघ और भाजपा से जुड़े आरोपियों को किसी भी तरीके से क्लीन चिट देना रह गया है।”

शर्मा ने आगे कहा, “सर्वोच्च न्यायालय को इसका संज्ञान लेना चाहिए और इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज को अपने कब्जे में लेना चाहिए। इनमें इकबालिया बयान, आरोपपत्र, फाइल और नोटिंग, सरकारी विभागों के बीच पत्राचार, एनआईए, महान्यायवादी, गृह मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और एनएसए के हुए पत्राचार आदि शामिल हैं।”

कांग्रेस ने यह प्रतिक्रिया मालेगांव विस्फोट मामले के प्रमुख आरोपी पुरोहित द्वारा एनएसए अजित डोभाल को लिखी चिट्ठी सामने आने पर दी है।

6 जनवरी, 2016 को लिखे पत्र में पुरोहित ने लिखा था कि मुंबई एटीएस (आतंकवाद-रोधी दस्ता) ने उनके खिलाफ फर्जी साक्ष्य गढ़े थे।

पुरोहित ने अपने इस पत्र में लिखा था, “मैं इस मामले में आपके तुरंत हस्तक्षेप की दिल से मांग करता हूं। मैं इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहा था जो अब पूरा होनेवाला है। मुझे एनआईए से काफी उम्मीद है।”

पुरोहित ने कहा कि एनआईए ने भी एटीएस द्वारा गढ़े गए तथ्यों के आधार की गई झूठी जांच के आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया है।

इस पत्र की सच्चाई पर हालांकि सरकार ने अभी तक कोई बयान नहीं दिया है। एनआईए ने पिछले हफ्ते दाखिल अपने आरोपपत्र में सभी 10 आरोपियों पर से मकोका का मामला हटा लिया है, जिसमें पुरोहित भी शामिल है।

आनंद शर्मा ने कहा, “एनएसए डोभाल और केंद्रीय गृह सचिव ने एनआईए द्वारा की जा रही जांच में हस्तक्षेप किया और उनके नोटिंग के साथ ये फाइलें विभिन्न सरकारी विभागों मं उसैन बोल्ट (ओलंपिक विजेता धावक) से भी ज्यादा तेजी से दौड़ती रहीं।”

एनएसए के आरोपपत्र का हवाला देते हुए आंनद शर्मा ने कहा, “सरकार यही काम समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट मामले में भी करेगी और इस मामले को भी बंद करा देगी।”

उन्होंने कहा कि सरकार के इन कदमों से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत का पक्ष बेहद कमजोर पड़ जाएगा। मोदी सरकार को यह सोचना चाहिए, देश की प्रतिष्ठा का ख्याल रखना चाहिए।

शर्मा ने यह भी कहा कि वर्ष 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा को क्लीन चिट देना शहीद पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे का अपमान है।

शर्मा ने कहा, “आरोपियों ने अपने अपराध स्वीकार किए थे और उसके बाद उन पर मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) लगाया गया था। अभी जो कुछ हुआ है, वह शहीद हेमंत करकरे का अपमान है।”

शर्मा ने कहा, “दुर्भाग्यवश करकरे देश को यह बताने के लिए हमारे बीच मौजूद नहीं हैं कि उन्होंने व उनकी टीम ने निष्पक्ष जांच की थी और आरोपियों ने अपने बयान में अपराध स्वीकार किए थे, और वे बयान आरोपपत्र में मौजूद थे।”

कांग्रेस नेता का बयान ऐसे समय में आया है, जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मालेगांव मामले में साध्वी प्रज्ञा और पांच अन्य आरोपियों को क्लीन चिट दे दिए हैं।

महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के प्रमुख करकरे ने मामले की जांच की थी। मुंबई में 26/11 के आतंकी हमले में करकरे शहीद हो गए थे।

शर्मा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, “आखिर सरकार ने अचानक यू-टर्न क्यों ले लिया?”

उन्होंने लिखा, “यह सरकार अपने से संबंधित संगठनों से जुड़े लोगों को बचाने की पूरी कोशिश कर रही है और कह रही है कि इन लोगों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ लगाए गए सारे आरोप झूठे थे।”

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आलोचना करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा, “आज भारत की अखंडता और आतंक से लड़ने की इसकी प्रतिबद्धता पर एक प्रश्नचिह्न् लग गया है।”

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