आइजोल, 27 नवंबर (आईएएनएस)। मिजोरम सरकार ने पड़ोसी देश म्यांमार के अशांत अराकन राज्य से विस्थापित होकर आए 1,300 आदिवासियों को आश्रय और राहत मुहैया कराई है। यह सभी लोग दक्षिणी मिजोरम में बतौर शराणार्थी रह रहे हैं। अधिकारियों ने सोमवार को इस बात की जानकारी दी।
लॉन्गटलाई जिला पुलिस प्रमुख लालसंगलुरा ने आईएएनएस को बताया, “करीब 1,300 पुरुष, महिलाएं और बच्चे अराकन राज्य से भाग कर आए हैं और शनिवार रात को लॉन्गटलाई जिले के चार गांवों में बतौर शरणार्थी रह रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “पिछले सप्ताह सेना और गैरकानूनी ‘अराकन सेना’ के सदस्यों के बीच भिड़ंत के बाद म्यांमार के यह लोग अपने घरों को छोड़कर भाग आए हैं। हिंसा के कारण हम इन्हें वापस नहीं भेज सकते।”
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अब जिला प्रशासन शराणार्थियों के लिए अस्थायी राहत शिविरों का निर्माण कर रहा है। उन्होंने कहा कि संघर्ष के कारण और ज्यादा शरणार्थी सीमा पार कर मिजोरम आ सकते हैं।
इलाके में असम राइफल्स और राज्य पुलिस को तैनात कर दिया गया है।
लालसंगलुरा ने कहा कि वह और लॉन्गटलाई के उपायुक्त अरुण टी और असम राइफल्स के वरिष्ठ अधिकारी मंगलवार को म्यांमार सीमा से सटे इलाके का दौरा करेंगे और राहत कार्यो का जायजा लेंगे। साथ ही शरणार्थियों के लिए दूसरे आवश्यक इंतजामों का भी निरीक्षण करेंगे।
सीमा पार कर मिजोरम पहुंचे शरणार्थियों में अधिकतर बौद्ध धर्म और ईसाई धर्म के लोग हैं। यह लोग स्थानीयों द्वारा बोली जानी वाली समान आदिवासी भाषा बोलते हैं।
यह चौथी बार है जब पड़ोसी देश में जातीय संकट के बाद म्यांमार के लोगों ने मिजोरम में प्रवेश किया है।
स्थानीय ग्रामीणों ने शुरू में अराकन लोगों को भोजन उपलब्ध कराने और उनके लिए आश्रय की व्यवस्था की।
पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम, म्यांमार के साथ 510 किलोमीटर और बांग्लादेश के साथ 318 किलोमीटर की सीमा साझा करता है। इन सीमाओं को क्रमश: असम राइफल्स और सीमा सुरक्षा बल द्वारा संरक्षित किया जाता है।
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