मुंबई, 12 नवंबर (आईएएनएस)। महानगर में शनिवार को 500 और 1000 रुपये के पुराने विमुद्रीकृत नोट बदलने और नए नोट निकालने के लिए लोगों की भीड़ बैंकों और एमटीएम पर उमड़ पड़ी। उनमें से बहुत सारे लोगों ने साप्ताहांत की छुट्टी कतार में खड़े होकर बिताई। लोग घर के खर्चे के लिए पैसा निकालने के लिए परेशान रहे।
लगातार तीसरे दिन भी सर्पाकार लंबी लाइनें लगी रहीं। इनमें से बहुत सारे लोगों ने 14 नवंबर से पहले महाराष्ट्र के हिल स्टेशनों पर या समुद्र के किनारे सैरगाह में जाने की योजना बनाई थी, लेकिन विमुद्रीकरण ने उनकी छुट्टी का मजा किरकिरा कर दिया।
चितरंजन सिंह नाम के एक व्यवसायी ने कहा, “हम लोगों ने छुट्टियां मनाने के लिए परिवार सहित कार से दहाणु बीच पर जाने की योजना बनाई थी, क्योंकि पहाड़ों पर ठंड काफी बढ़ गई है। लेकिन इस अचानक विमुद्रीकरण की वजह से अंतिम क्षण में कार्यक्रम रद्द कर दिया, क्योंकि हमारे पास अलग से नकदी नहीं थी।”
यही स्थिति मुंबई के हजारों लोगों की है, जिन्होंने अपनी यात्रा और होटल की बुकिंग अंतिम क्षणों में रद्द कर दी। बहुत सारे लोगों को तो अपनी दी गई अग्रिम राशि से भी हाथ धोना पड़ा है, क्योंकि वे अपने ही नोटों को बदलने या बैंक से निकालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सभी बैंकों की 12 नवंबर को छुट्टी थी। लेकिन सभी निजी और सरकारी बैंक शनिवार और रविवार को अन्य दिनों की तरह काम कर रहे हैं। कई तो 20 नवंबर को भी खोलने की योजना बना रहे हैं।
उपनगरीय इलाके के कुछ ही बैंकों की शाखाओं ने गरमी में कतार में अपनी बारी का इंतजार कर रहे लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था की है।
मुंबई में शुक्रवार को मुलुंड में एक बैंक की शाखा के बाहर घंटों इंतजार करने के दौरान दिल का दौरा पड़ने से विश्वनाथ वर्तक नाम के एक बुजुर्ग की मौत हो गई।
छोटे व्यापारी, सड़क के किनारे स्टॉल लगाने वाले, चाय वाले ग्राहकों के इंतजार में ऐसे ही बैठे रहे।
बहुत सारे ग्राहक बैंकों से दो हजार और पांच सौ के नोट लेकर वापस चले गए, क्योंकि बैंकों में छोटे नोट नहीं थे।
dharmpath.com dharmpath