मुंबई, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। मुंबई की एक विशेष अदालत ने बुधवार को 2002-03 में यहां हुए तिहरे बम विस्फोटों के तीन दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई।
उम्र कैद की सजा पाने वाले तीनों दोषियों में मुजम्मिल अंसारी और उसके साथी फरहान खोट और वाहिद अंसारी शामिल हैं।
इन हमलों में 12 लोगों की मौत हुई थी और 139 से भी अधिक लोग घायल हुए थे।
इस मामले में चार अन्य दोषियों को 10 साल कैद की सजा सुनाई गई है। इनमें प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का महासिचव साकिब नचान, आतिफ नसीर मुल्ला, गुलाम कोटला और हसीब जुबैर मुल्ला शामिल हैं।
तीन अन्य दोषियों मोहम्मद अनवर अली, मोहम्मद कामिल और नूर मोहम्मद को विशेष पोटा न्यायाधीश पी. आर. देशमुख द्वारा दो साल कैद की सजा सुनाई गई है।
इन सभी 10 दोषियों को 29 मार्च को अदालत ने बम विस्फोट का दोषी पाया था। इसके बाद सरकारी वकील रोहिणी सालियान और बचाव पक्ष के वकीलों के बीच सजा की मात्रा पर बहस हुई, जो मंगलवार को संपन्न हो गई।
इस दिन विशेष न्यायाधीश देशमुख ने सबूतों के अभाव में हारून लोहार, नदीम पलोबा और अदनान मुल्ला को बरी कर दिया था।
इस मामले में पांच आरोपी आज भी फरार हैं।
एक ही साजिश के तहत ये विस्फोट छह दिसंबर 2002 को मुंबई सेंट्रल टर्मिनस में मैकडॉनल्ड के पास, 27 जनवरी 2003 को विले पार्ले बाजार में और 13 मार्च 2003 को मुलुंड के पास उपनगरीय ट्रेन के महिला कंपार्टमेंट में हुए थे। इसमें 12 लोगों की मौत हुई थी और 139 से भी अधिक लोग घायल हुए थे।
मुंबई सेंट्रल टर्मिनस में मैकडॉनल्ड के पास हुए पहले बम विस्फोट (छह दिसंबर 2002) में दो लोगों की मौत हुई थी और 50 अन्य घायल हुए थे। दूसरे बम विस्फोट (27 जनवरी 2003) में एक की मौत हुई थी और 30 अन्य लोग घायल हुए थे, जबकि तीसरे बम विस्फोट (13 मार्च 2003) में नौ लोगों की मौत हुई थी और 70 लोग घायल हुए थे।
इस मामले में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपनी दलील में कहा था कि नचान ने लश्कर-ए-तैयबा के फैसल खान और अन्य के साथ मिलकर ये बम विस्फोट किए थे।
पुलिस ने मामले में 25 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें से अधिकतर को 2003 में ही गिरफ्तार कर लिया गया था। पांच की सुनवाई की अवधि के दौरान मौत हो गई, जबकि पांच अब भी फरार हैं।
नचान को बम विस्फोटों के लिए आवश्यक लोग, हथियार और गोला बारूद की व्यवस्था करने के जुर्म में सजा सुनाई गई है, जबकि वाहिद और अन्य को बम निर्माण के जुर्म में सजा दी गई है।
पुलिस ने भारतीय दंड संहिता, रेल अधिनियम, शस्त्र अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और पोटा के तहत कई धाराओं में इन सभी पर हत्या, हत्या की कोशिश, राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आपराधिक षड्यंत्र के मामले दर्ज किए थे।
इस बीच, आरोपियों को कानूनी सहायता प्रदान करने वाले जमीयत उलेमा-ए-हिंद (जेयूईएम) ने इस बात पर खुशी जताई कि फांसी की सजा नहीं सुनाई गई, लेकिन संगठन का यह भी कहना है कि बंबई उच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दी जाएगी।
जेयूईएम के प्रवक्ता ने सरकार से दो साल के भीतर आतंकवाद से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का आग्रह किया।
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