मुंबई, 3 जुलाई (आईएएनएस)। मुंबई में सोमवार को हजारों की संख्या में आम लोगों ने हाल के समय में देशभर में घृणा अपराधों और भीड़ द्वारा की गई हिंसा के खिलाफ विरोध-प्रदर्शित करने के लिए रैली निकाली।
कोतवाल गरडस से दादर के चैतन्यभूमि तक निकाली गई इस रैली में डॉ. बी. आर. अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर, विश्वास उतगी, विभिन्न श्रमिक संघों के नेताओं, वामपंथी दलों, गैर सरकारी संगठनों, समाज कल्याण एवं सांस्कृतिक संगठनों के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के प्रख्यात लोगों ने हिस्सा लिया।
उतगी ने कहा, “देश की केंद्रीय सत्ता में 2014 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का उभार, भीड़ द्वारा हिंसा और मुस्लिम, दलित एवं बुद्धिजीवियों की नियमित हत्या के रूप में सामने आया है।”
रैली के आयोजकों ने एक बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन सब के खिलाफ तभी बोलते हैं, जब जनता का विरोध चरम पर पहुंच जाता है और अगली बार जनता का धैर्य जवाब देने तक वह चुप्पी साधे रहते हैं।
देश में इस तरह की घटना की शुरुआत 2014 में पुणे में एक इंजीनियर मोहसिन शेख की मुस्लिम की तरह दिखाई देने के चलते हुई हत्या से हुई।
आयोजकों ने कहा कि पुणे वासी लेखक एवं सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर के हत्यारे आज भी खुले में घूम रहे हैं और दाभोलकर के बाद उन्होंने कोल्हापुर में वामपंथी नेता गोविंद पनसारे और कर्नाटक में एम. एम. कलबुर्गी की भी हत्या कर दी।
देश में हिंसा के इस मौजूदा माहौल पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में फैली बर्बरता ने एक ऐसी पीढ़ी को जन्म दिया है, जो कमजोर और असहाय तबके के लोगों के खिलाफ हिंसा को गलत नहीं मानती और देशभर में हर जगह अल्पसंख्यक डर में जी रहे हैं।
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