मुंबई, 29 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस की प्रदेश इकाई ने शनिवार को मुंबई विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणाम घोषित करने में हुए अत्यधिक विलंब को लेकर राज्यपाल सी. वी. राव से इसकी जिम्मेदारी लेने और नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की है।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सचिन सावंत ने अपने बेहद तीखे बयान में मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति संजय देशमुख को बर्खास्त किए जाने और शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री रवींद्र वाइकर को मंत्रिमंडल से हटाए जाने की मांग भी की है।
विश्वविद्यालय में उपजे इस संकट को ‘अत्यधिक गंभीर’ करार देते हुए सावंत ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा के चलते राज्य में शिक्षा प्रणाली ‘बर्बाद’ हो चुकी है और कुलपति सहित विश्वविद्यालय में अहम पदों पर नियुक्ति में काबिलियत की जगह आरएसएस से संबंधों को तरजीह दी जा रही है।
सावंत ने कहा, “वर्तमान कुलपति की नियुक्ति करते वक्त अनुभव एवं योग्यता को दरकिनार कर देशमुख को सिर्फ इसलिए कुलपति बनाया गया, क्योंकि वह आरएसएस के करीबी थे और तीन साल आरएसएस समर्थक संगठन रामभाउ म्हालगी प्रबोधिनी में बिताए थे।”
उन्होंने राज्य सरकार से कुलपति की नियुक्ति के लिए आवेदन देने वाले सभी अभ्यर्थियों की सूची सार्वजनिक करने का आग्रह किया, ताकि लोगों को पता चल सके कि 2015 में कैसे उच्च योग्यता वाले लोगों को दरकिनार कर आरएसएस समर्थक व्यक्ति की नियुक्ति की गई।
सावंत ने कहा, “कुलपति बनने के बाद देशमुख ने गुरु दक्षिणा स्वरूप रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी को रिसर्च एसोसिएट इंस्टीट्यूट का दर्जा दे दिया। भविष्य में अब यह संगठन राजनीति विज्ञान में मास्टर, यहां तक कि डॉक्टरेट जैसी शीर्ष उपाधियां भी प्रदान कर सकता है।”
उन्होंने कुलपति देशमुख पर विश्वविद्यालय प्रशासन के कामकाज की जानबूझकर अवहेलना करने के लिए आलोचना की, जिसके चलते लाखों बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है, क्योंकि तय समय पर विश्वविद्यालय ने परीक्षा परिणाम ही घोषित नहीं किए हैं।
हाल ही में राज्यपाल ने इसी साल हुई विभिन्न पाठ्यक्रमों की अर्धवार्षिक परीक्षाओं के परिणाम घोषित करने में हुई अत्यधिक देरी के लिए कुलपति को लताड़ लगाई थी।
राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति राज्यपाल राव ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए चार जुलाई को देशमुख के खिलाफ समन जारी कर उन्हें 31 जुलाई तक सभी परीक्षा परिणाम घोषित किए जाने का आदेश दिया था। राव ने परीक्षा परिणाम घोषित करने की दिशा में हुई प्रगति की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र अधिकारी की भी नियुक्ति की थी, जिसे प्रतिदिन राज्यपाल और राज्य सरकार को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था।
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