तिरुवनंतपुरम, 27 सितम्बर (आईएएनएस)। केरल विधानसभा में मंगलवार को माहौल गुस्से और हंगामे वाला रहा। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और विपक्ष के विधायकों के बीच जमकर वाकयुद्ध हुआ।
सदन में हंगामा तब शुरू हुआ जब विपक्ष के विधायकों ने पेशेवर शिक्षा क्षेत्र की फीस में बहुत अधिक बढ़ोतरी को लेकर विरोध किया। इस पर मुख्यमंत्री ने एक तीखी टिप्पणी कर दी। इस पर हुए हंगामे की वजह से विधानसभा की बैठक को दिन भर के लिए स्थगित करना पड़ा।
विजयन ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी दल द्वारा लाए गए कार्यस्थगन प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा कि फीस बढ़ाने के खिलाफ युवक कांग्रेस द्वारा की जा रही हड़ताल दरअसल ‘टीवी चैनलों के लिए’ की जा रही है।
जैसे ही उन्होंने यह टिप्पणी की, गुस्से में विपक्षी सदस्य आसन के समीप आ गए और विजयन के बयान के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब विजयन ने विपक्षी विधायकों पर फिर फब्ती कसी और कहा कि सदन में कोई चाल नहीं चलें क्योंकि वह काम नहीं करेगी।
इस बयान के बाद विपक्ष और अधिक गुस्से में आ गया और नारेबाजी और तेज हो गई। विजयन अपनी बात पर अड़े रहे और कहा कि जो कहने की जरूरत होगी, उसे कहा जाएगा।
विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथाला ने विजयन का यह कहकर जवाब दिया कि उनकी धमकियां सदन में काम नहीं करेंगी।
चेन्निथाला ने कहा, “विजयन का लहजा, उनकी भाषा और अभिप्राय, जिस पद पर वह हैं उसके अनुरूप नहीं है। आपको यह नहीं भूलना चाहिए कि आप जिस पद पर बैठे हैं उस पर कई बड़ी हस्तियां रह चुकी हैं। आप इस तरह से बात कर रहे हैं जैसे आप अपनी पार्टी की बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। एक मुख्यमंत्री को इतना नीचे नहीं गिरना चाहिए। उन्हें सहनशील होना चाहिए। हो सकता है कि यह विजयन का अंदाज हो लेकिन यह एक मुख्यमंत्री को नहीं जंचता।”
चेन्निथला ने उसके बाद विधानसभा अध्यक्ष पी. श्रीरामकृष्णन से कहा कि वह यह सुनिश्चित करें कि या तो विजयन अपनी अशिष्ट टिप्पणी के लिए माफी मांगे या इसे सदन की कार्यवाही से हटाया जाए।
इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने चुप्पी लगा ली। विपक्षी सदस्य नारेबाजी करने लगे और इसकी वजह से विधानसभा अध्यक्ष को दिन की सदन बैठक स्थगित कर देनी पड़ी।
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