‘मुसलमानों को मुस्लिम परिवार कानून की जरूरत’

नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। मुस्लिम महिलाओं के एक संगठन ने सोमवार को कहा कि मुस्लिम समुदाय को एक ‘मुस्लिम परिवार कानून’ की जरूरत है। संगठन ने सरकार और विपक्ष से इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करने का आग्रह किया, ताकि एक संतुलित और व्यापक कानून सुनिश्चित किया जा सके।

भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (बीएमएमए) ने जारी एक बयान में कहा, “सरकार को अब प्रगतिशील महिलाओं की आवाज सुननी चाहिए।”

उन्होंने कहा, “लोकसभा द्वारा पारित अध्यादेश में बीएमएमए की संशोधन की मांगों पर सरकार ने अब तक ध्यान नहीं दिया है।”

संगठन के अनुसार, “महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले और पुरुषों को डराने वाले एक संतुलित कानून की जरूरत है, जिसे बीएमएमए ने सरकार के समक्ष इस संशोधित संस्करण को पेश कर उसकी सहायता की है। सरकार मुस्लिम महिलाओं को कुरान और संवैधान में प्रदत्त अधिकारों की रक्षा करने के लिए पिछले एक दशक से काम कर रहीं महिलाओं की आवाज दबाना क्यों चाहती है?”

संगठन ने कहा, “कुरान के साथ-साथ संविधान के कई अनुच्छेदों में इन सभी मामलों में महिलाओं के अधिकारों का संरक्षण स्पष्ट रूप से किया गया है।”

बयान के अनुसार, “दुर्भाग्यवश, रूढ़िवादी समाज की पुरुष प्रधान सोच के कारण महिलाएं न्याय से वंचित हैं।”

संगठन ने कहा है कि संसद को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए उसी तरह का मुस्लिम परिवार कानून पारित करना चाहिए, जिस तरह का कानून उसने ‘हिंदू विवाह अधिनियम, 1955’ और ‘हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956’ पारित किया था।

संगठन के अनुसार, भारत में मुस्लिम महिलाओं को ‘शरीयत आवेदन अधिनियम, 1937’ के साथ-साथ ‘मुस्लिम विवाह अधिनियम, 1939’ का विघटन करके या एक नया मुस्लिम विवाह कानून पारित कर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाया जा सकता है।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493