नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय समाज को सांप्रदायिकता के नाम पर बांटने के प्रयासों के बीच थैलेसिमिया रोग से पीड़ित अपनी सात वर्षीय बेटी के इलाज के लिए आर्थिक मदद की बाट जोह रहे एक मुसलमान पिता को तब बेहद सुखद आश्चर्य हुआ, जब उसे अपनी मदद की गुहार का सकारात्मक जवाब राजधानी की कई दुर्गा पूजा समितियों से मिला।
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय समाज को सांप्रदायिकता के नाम पर बांटने के प्रयासों के बीच थैलेसिमिया रोग से पीड़ित अपनी सात वर्षीय बेटी के इलाज के लिए आर्थिक मदद की बाट जोह रहे एक मुसलमान पिता को तब बेहद सुखद आश्चर्य हुआ, जब उसे अपनी मदद की गुहार का सकारात्मक जवाब राजधानी की कई दुर्गा पूजा समितियों से मिला।
पूजा समितियों से मदद की गुहार लगाने पर उसके पास 23,000 रुपये से ज्यादा एकत्रित हो गए, जिससे अब उसकी बेटी का इलाज संभव है।
दक्षिण दिल्ली की एक कसीदाकारी इकाई में कार्यरत पश्चिम बंगाल के एक शिल्पकार मुंशी नजीबुल ने आईएएनएस को बताया, “जब मस्जिद के बड़ों के बहरे कानों में मेरी फरियाद का कोई असर नहीं हुआ, तब मैंने दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों की दुर्गा पूजा समितियों से मदद मांगी।”
नजीबुल की बेटी को स्वास्थ्य लाभ हो रहा है, लेकिन रक्तदोष को पूरी तरह दूर करने के लिए उसे अस्थि-मज्जा प्रत्यारोपण की जरूरत है।
नजीबुल ने कहा, “मुझे बेहद आश्चर्य हुआ जब अपनी बीमार बेटी के इलाज के लिए पूजा समितियों को मदद की गुहार के जवाब में मुझे 23,000 रुपये मिले। “
नजीबुल ने कहा कि एक दूसरे की मदद के मामले में धर्म आड़े नहीं आता और लोगों के स्तर पर इस देश में हमेशा यही होता रहा है।
नजीबुल ने कहा, “मैं भले ही मुसलमान हूं, लेकिन मैं कभी किसी भी धर्म के लोगों की मदद से पीछे नहीं हटूंगा।”
गेट्रर कैलाश नोएडा के दुर्गोत्सव के महासचिव समीर बनर्जी ने दान के लिए हिंदू उत्सव आयोजकों के पास आने के लिए नजीबुल के साहस की प्रशंसा की।
बनर्जी ने नजीबुल को 10,000 रुपये दिए हैं।
बनर्जी ने आईएएनस को बताया, “पैसे मांगने से पहले उसने सबसे पहले कहा ‘मैं एक मुसलमान हूं’ और हमने कहा कि इससे क्या फर्क पड़ता है।”
बनर्जी के मुताबिक, नजीबुल ने दुर्गा पूजा समितियों से मदद इसलिए मांगी, क्योंकि उसे विश्वास था कि धर्म को मुद्दा बनाए बगैर, मानवता के आधार पर उसकी मदद की जाएगी।
नजीबुल ने कहा कि किसी भी पूजा समिति ने उसके मुसलमान होने पर कोई भी सवाल नहीं उठाया और उसकी मदद की।
बनर्जी के मुताबिक, “धर्म कभी भी मानवता के आड़े नहीं आना चाहिए। जरूरत पड़ने पर किसी की मदद न करना ज्यादा बड़ा गुनाह है।”
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