नई दिल्ली, 26 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक औचक पाकिस्तान दौरे की रणनीतिक विशेषज्ञों ने शनिवार को सराहना की है और इसे दोनों देशों के बीच पटरी से उतर गई द्विपक्षीय शांति प्रक्रिया को बहाल करने की दिशा में अहम कदम बताया है।
नई दिल्ली, 26 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक औचक पाकिस्तान दौरे की रणनीतिक विशेषज्ञों ने शनिवार को सराहना की है और इसे दोनों देशों के बीच पटरी से उतर गई द्विपक्षीय शांति प्रक्रिया को बहाल करने की दिशा में अहम कदम बताया है।
पाकिस्तान मामलों पर काम कर चुके पूर्व राजनयिकों और सेवानिवृत्त जनरलों ने कहा कि अफगानिस्तान से भारत लौटते हुए शुक्रवार को अचानक पाकिस्तान चले जाने की और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात करने की मोदी की पहल अच्छी शुरुआत है।
विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव पनक रंजन चक्रवर्ती ने आईएएनएस से कहा, “यह एक जरूरी और सद्भावपूर्ण यात्रा थी।”
भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल वेद प्रकाश ने भी इस पर सहमति जताई।
उन्होंने कहा, “यह दोनों देशों के बीच संबंध कायम करने की रणनीति है, जो हमारे देश के लिए हितकारी साबित होगा। यह एक अच्छा कदम है।”
जनरल मलिक ने आगे कहा, “मेरे खयाल से इससे महत्वपूर्ण मुद्दों पर समाधान की दिशा में यह दोनों देशों के लिए अनुकूल माहौल का निर्माण हुआ है।”
प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस को छोड़कर मोदी के इस औचक लाहौर दौरे को चारों ओर से सराहना मिल रही है, हालांकि कांग्रेस ने इतना अचानक पाकिस्तान चले जाने पर सवाल उठाए हैं।
उल्लेखनीय है कि मोदी ने काबुल से फोन कर नवाज शरीफ को जन्मदिन की बधाई दी, जिसने दोनों देशों के बीच जमी हुई बर्फ को पिघलाने का काम किया।
भारतीय अधिकारियों ने जहां बताया कि शरीफ ने फोन पर मोदी को भारत लौटते हुए बीच में लाहौर रुकने का निमंत्रण दिया, वहीं पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि मोदी ने खुद पाकिस्तान आने की इच्छा व्यक्त की, जिसे शरीफ ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
पाकिस्तान के एक पत्रकार ने शनिवार को बताया कि दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच कश्मीर को लेकर भी बातचीत हुई।
कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञ सी. राजा मोहन का मानना है कि बीते कुछ सप्ताह में पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक स्तर पर शुरू की गई बातचीत को तेजी देने के उद्देश्य से मोदी ने इस्लामाबाद का यह दौरा किया।
पाकिस्तान का दौरा करने वाले मोदी चौथे भारतीय प्रधानमंत्री हैं और यह यात्रा किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 11 वर्षो में पहली पाकिस्तान यात्रा रही।
हालांकि खुद मोदी की पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उनकी इस यात्रा पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि मोदी को पाकिस्तान पर छूट दी जानी चाहिए।
स्वामी ने ट्वीट किया, “नरेंद्र मोदी चूंकि एक रणनीति के तहत काम कर रहे हैं, इसलिए उन्हें थोड़ी छूट दी जानी चाहिए। प्रधानमंत्री के तौर पर उन्हें जोखिम भरे निर्णय लेने की छूट दी जानी चाहिए।”
जम्मू एवं कश्मीर से मोदी की इस यात्रा को लेकर सबसे सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आई हैं।
मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा, “यह बिल्कुल सही दिशा में उठाया गया सही कदम है। निश्चित तौर पर इससे दोनों देशों के बीच जमी बर्फ पिघलेगी।”
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जहां इसे ‘बहुत अच्छा कदम और सराहनीय प्रगति’ करार दिया, वहीं उन्होंने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के एकदूसरे के साथ वार्ता में निरंतरता दिखानी चाहिए।
जम्मू एवं कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी ने कहा है कि उन्होंने हमेशा से दोनों देशों के बीच अच्छे संबंधों का समर्थन किया है, लेकिन उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि कश्मीर विवाद को सबसे पहले हल किया जाना चाहिए।
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