नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सभी ‘धर्मनिरपेक्ष ताकतों’ से लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर केंद्र सरकार के बार-बार प्रहार के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह किया है।
माकपा के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेमोक्रेसी’ में प्रकाशित एक संपादकीय में कहा गया है कि उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार की बर्खास्तगी और न्यायिक हस्तक्षेप के बाद उसके फिर से सत्ता में लौटने के प्रकरण ने नरेंद्र मोदी सरकार की छवि दागदार कर दी है।
माकपा ने कहा, “मोदी सरकार की छवि बुरी तरह दागदार हुई है। मोदी-अमित शाह की जोड़ी के लोकतंत्र विरोधी तरीकों को तगड़ा झटका लगा है।”
माकपा ने कहा, “मोदी शासन की बढ़ती निरंकुशता को देखते हुए उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे अपने तरीके बदलेंगे।”
माकपा ने कहा, “केवल न्यायतंत्र पर निर्भर रहने की जगह सभी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताकतों को लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर प्रहार के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।”
संपादकीय के मुताबिक, उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार को गिराने और दल बदलुओं की मदद से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार लाने का मोदी सरकार का प्रयास जागरूक न्यायतंत्र ने विफल कर दिया है।
संपादकीय के मुताबिक, “उत्तराखंड प्रकरण भविष्य में उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो सरकारों को गिराने के लिए अनुच्छेद 356 का प्रयोग करना चाहते हैं।”
संपादकीय में कहा गया है, “उम्मीद है कि कांग्रेस को भी सबक मिल गया होगा। पहले कांग्रेस सरकार ने ही केंद्र में रहने के दौरान गैर कांग्रेसी राज्य सरकारें गिराने के लिए राष्ट्रपति शासन का गलत इस्तेमाल किया था।”
माकपा ने कहा, “वह खुद उसी शैतानी तंत्र का शिकार बन गई।”
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