मोदी ने बिहार में किया रेल पुलों का उद्घाटन, ट्रेन का शुभारंभ (राउंडअप)

पटना/हाजीपुर, 12 मार्च (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पहली बार बिहार पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पटना उच्च न्यायालय के शताब्दी वर्ष समापन समारोह में शामिल हुए, इसके बाद हाजीपुर में उन्होंने कई रेल पुलों का उद्घाटन और कुछ का शिलान्यास किया।

वैशाली जिले के हाजीपुर के छौंकिया में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने दीघा-सोनपुर रेल पुल और मुंगेर में नवनिर्मित रेल-सह-सड़क पुल राष्ट्र को समर्पित किया। इसके अलावा मोकामा में राजेंद्र पुल के सामानंतर एक अतिरिक्त रेल पुल का शिलान्यास किया।

प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम के दौरान सप्ताह में तीन दिन चलने वाली पाटलिपुत्र-लखनऊ एक्सप्रेस को हरी झंडी भी दिखाई।

इस मौके पर आयोजित रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ये रेल परियोजनाएं उस वक्त शुरू हुई थीं, जब नीतीश कुमार रेलमंत्री और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री हुआ करते थे। मगर, यह पुल अब बनकर तैयार हो पाया है।

मोदी ने कहा कि लेट-लतीफी के कारण 600 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले पुल की लागत 3000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

प्रधानमंत्री ने संकेतों में कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पुरानी 10 वर्षो की सरकार ने अगर इन योजनाओं को उपेक्षित नहीं किया होता तो ये पांच वर्ष पूर्व ही पूरी हो गई होतीं।

उन्होंने कहा, “नीतीश जी के रेलमंत्री रहते समय का सपना आज पूरा हो गया।”

मोदी ने कहा कि शॉर्टकट से विकास नहीं हो सकता। तत्कालीन आवश्यकता के साथ-साथ लंबे अरसे की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए कोशिश करनी होगी। उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए बिहार का भाग्य बदलनना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के विकास का ‘नर्वसेंटर’ अब पूर्वी भारत है। इन क्षेत्रों के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है। उन्होंने रेल और सड़क को विकास की नींव बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार इन दोनों क्षेत्रों के विकास के प्रति कृतसंकल्पित है।

बिहार के विकास को प्राथमिकता की सूची में रखने की बात कहते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार बिहार के विकास के लिए भी काफी कुछ कर रही है।

आम बजट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गरीब परिवार को गैस कनेक्शन देने का बीड़ा सरकार ने उठाया। ऐसे में आने वाले तीन वर्ष के अंदर चूल्हा जलाने वाली गरीब महिलाओं को घरेलू गैस उपलब्ध करवाई जाएगी।

बिजली को विलासिता नहीं, आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि अभी 1000 दिन पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन 1000 गांवों में बिजली पहुंच गई है। इसका सबसे बड़ा हिस्सा बिहार और उत्तर प्रदेश में है। उन्होंने कहा कि इसके लिए नीतीश कुमार ने काफी मदद दी।

उन्होंने बिहार में दो लोकोमोटिव इंजन के कारखानों की स्थापना की बात करते हुए कहा कि बिहार को इस तरह की सौगात मिली है।

प्रधानमंत्री ने दावा किया कि पूर्व की सरकार ने पांच वर्ष में बिहार के रेल लिए जितना खर्च किया, उससे करीब ढाई गुना ज्यादा खर्च वर्तमान सरकार ने डेढ़ वर्ष में कर दिया है।

इस कार्यक्रम में रेलमंत्री सुरेश प्रभु, केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी, गिरिराज सिंह व रामविलास पासवान भी मौजूद रहे।

पटना उच्च न्यायालय शताब्दी वर्ष समापन समारोह :

प्रधानमंत्री पटना उच्च न्यायालय में आयोजित समारोह में पहुंचे। उन्होंने शताब्दी वर्ष का समापन किया। शताब्दी वर्ष का उद्घाटन सालभर पहले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने किया था।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि पटना उच्च न्यायालय का शताब्दी समारोह नई सदी की जिम्मेवारियों का प्रारंभ भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे समारोह नए संकल्पों के अवसर होते हैं।

मोदी ने कहा, “जिस व्यवस्था के पास एक सदी की विरासत हो, वह देश को बहुत कुछ दे सकता है। इस शताब्दी में पटना उच्च न्यायालय ने कई ऊंचाइयों को छुआ है और जिन कार्य-संस्कृति के द्वारा समाज को आस बंधवाई है, उसे आगे बढ़ाने की जरूरत है।”

उन्होंने वकीलों की चर्चा करते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई में वकीलों का बहुत योगदान रहा है। आज भी जब-जब देश पर संकट आया है वकीलों ने अपनी आवाज बुलंद की है।

उन्होंने न्याय प्रणाली में तकनीक के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि आज बार सदस्य के रूप में गूगल की अपनी अलग भूमिका हो गई है। इस कारण लोगों को अपने फैसले देने में सहूलियत हुई है। उन्होंने कहा कि न्याय में लोगों का विश्वास गहरा हुआ है तथा अदालत ने सामान्य लोगों को मजबूत बनाया है।

मोदी ने व्यवस्था को मजबूत करने पर बल देते हुए कहा, “व्यवस्थाएं डायनेमिक और प्राग्रेसिव नहीं होंगी तो हम समय के साथ नहीं चल पाएंगे। हमारे लिए व्यवस्थाओं को प्राणवान बनाने के लिए चुनौती है।”

अदालतों में वर्षो से लंबित पड़े हजारों मामलों पर चिंता जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री ने सलाह दी कि सभी लंबित मामलों की सूची तैयार की जा सकती है। इसके बाद मामलों को जल्द निपटाया जा सकता है।

समारोह में भाग लेना सौभाग्य की बात : टी.एस. ठाकुर

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर ने कहा कि इस समारोह में भाग लेना सौभाग्य की बात है। बिहार इतिहास और संस्कृति के मामले में बड़ा राज्य है। बिहार ने देश को कई वैज्ञानिक, अधिवक्ता, न्यायाधीश व वैज्ञानिक दिए हैं।

उन्होंने कहा कि साक्षरता के बढ़ने के साथ ही लोगों में कानून के प्रति लोगों की जागरूकता भी बढ़ी है। उन्होंने न्यायाधीशों की कमी पर चिंता जाहिर की और कहा कि जल्द ही नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू होगी।

जल्द न्याय मिलेगा तो लोकतंत्र पर विश्वास बढ़ेगा : नीतीश

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए स्वतंत्र न्यायपालिका की बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा कि लोगों को अगर जल्द न्याय मिलेगा तो लोकतंत्र पर विश्वास भी बढ़ेगा।

नीतीश ने कहा कि यह गर्व की बात है कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी पटना उच्च न्यायालय में वकालत की थी। उन्होंने कहा कि पटना उच्च न्यायालय के न्याय-निर्णय की अहमियत रही है। यहां एक से एक विद्वान अधिवक्ताओं ने वकालत की है और आज का दिन उन सभी के साथ-साथ बिहारवासियों के लिए गौरव का दिन है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसंख्या बढ़ने के साथ मुकदमों और वादों की संख्या भी बढ़ी है। उन्होंने कहा, “हम सभी का कर्तव्य और जिम्मेवारी है कि लोकतंत्र में न्यायपालिका को मजबूत बनाए रखने में योगदान दें।”

नीतीश ने कहा, “न्यायपालिका की जो भी जरूरतें हैं, हम अपने सीमित संधाधनों के बावजूद उसे पूरा करने की कोशिश करते हैं। केंद्र व राज्य सबका दायित्व है कि न्यायपालिका को मजूबत करे। भारत में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हैं और इसके लिए हम सब प्रतिबद्ध हैं।”

समारोह को केंद्रीय कानून मंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा व राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने भी संबोधित किया।

इससे पहले पटना हवाईअड्डे पर उतरे प्रधानमंत्री मोदी को राज्यपाल रामनाथ कोविंद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वागत किया।

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