मोदी सरकार की है संकीर्ण विचारधारा : नयनतारा सहगल

कोलकाता, 23 जनवरी (आईएएनएस)। लेखिका नयनतारा सहगल ने शनिवार को मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह सरकार संकीर्ण विचारधारा रखने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि ‘असहमति पर हमलों’ को देखकर लगता है कि यह ‘फासीवाद का भारतीय संस्करण’ है।

कोलकाता, 23 जनवरी (आईएएनएस)। लेखिका नयनतारा सहगल ने शनिवार को मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह सरकार संकीर्ण विचारधारा रखने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि ‘असहमति पर हमलों’ को देखकर लगता है कि यह ‘फासीवाद का भारतीय संस्करण’ है।

सहगल ने टाटा स्टील कोलकाता लिटरेटी मीट में एक चर्चा के दौरान कहा, “हिन्दुत्व के नाम पर जो हो रहा है, मैं उस दिन का इंतजार कर रही हूं कि संस्कृति के नाम पर संस्कृति मंत्री खजुराहो की नग्न मूर्तियों को साड़ी पहनाने का आदेश जारी करेंगे। क्योंकि ऐसा भी हो सकता है।”

मोदी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि वे उदारवारी रुख रखते थे। लेकिन वर्तमान व्यवस्था के तहत चर्चा और बहस के लिए कोई जगह नहीं है।

उन्होंने कहा, “हिन्दुत्व की जिस विचारधारा पर आज सरकार चल रही है, वह हिन्दुत्व नहीं है। पिछले चुनावों के दौरान ऐसा कभी नहीं बताया गया कि सरकार की यह नीति रहने वाली है। चुनावों के दौरान सिर्फ विकास की बातें हुआ करती थी।”

सहगल उन पहले साहित्यकारों में एक हैं जिन्होंने ‘बढ़ती असहिष्णुता’ को लेकर साहित्य अकादमी का अवार्ड लौटा दिया था।

उन्होंने कहा, “असहमति पर हमला किया जा रहा है। मेरा मतलब है या तो वे आप पर हॉकी स्टिक से हमला करेंगे, या पत्थर फेंक कर मारेंगे, नहीं तो मुंह पर कालिख पोत देंगे या आपकी जान ले लेंगे। लेकिन सरकार इन पर बिल्कुल चुप है। “

उन्होंने कहा कि मैं समझती हूं कि आज हम जिस हालात में रह रहे हैं वह किसी भी देश के लिए बेहद खतरनाक हालत है। मैं इसे फासीवाद का भारतीय संस्करण कहती हूं।

यह पूछे जाने पर कि अगर कोई किसी के काम से आहत हो तो क्या करे। सहगल ने कहा कि हर किसी को यह हक है कि वह अहिंसक प्रतिरोध से जवाब दे।

उन्होंने समझाते हुए कहा, “हम अपनी नाराजगी लिखकर, पेंटिंग बनाकर या कला के किसी भी रूप में या वैज्ञानिक खोजों के जरिए जाहिर कर सकते हैं। लेकिन किसी लोकतांत्रिक समाज में महत्वपूर्ण यह है कि इसे अहिंसक तरीके से होना चाहिए। हिंसा वही करते हैं जिसे असहमति पसंद नहीं आती और उसे रोका जाना चाहिए।”

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