नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने बुधवार को कहा कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर योग सत्रों के दौरान ‘ओम’ का उच्चारण जरूरी नहीं है। यह स्वैच्छिक है।
नायडू ने एक ट्वीट के जरिए कहा, “योग को विवादास्पद न बनाएं। ‘ओम’ का उच्चारण जरूरी नहीं है। योग एक प्राचीन भारतीय कला है जो शरीर और मस्तिष्क, दोनों को लाभ पहुंचाती है।”
नायडू की यह टिप्पणी केंद्र सरकार के परिपत्र की खबरों के मद्देनजर आई है, जिसमें 21 जून को 45 मिनट के योग सत्र से पहले ओम के उच्चारण और वेद मंत्रों को पढ़ने का निर्देश दिया गया है।
इससे पहले आयुष (आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) मंत्रालय ने भी कहा था कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विवाद खड़ा करने का प्रयास न किया जाए क्योंकि किसी को भी ओम के उच्चारण के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
आयुष मंत्रालय के संयुक्त सचिव अनिल कुमार ने आईएएनएस को बताया, “योग सत्र से पहले ओम का उच्चारण करना जरूरी नहीं है। यह स्वैच्छिक है। इस दौरान कोई चाहे तो वह चुप रह सकता है। कोई इस पर आपत्ति नहीं करेगा।”
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