जयपुर, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत-पाकिस्तान सीमा से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के एक छोटे से गांव मदेरन के रहने वाले साहब राम सहारन को पारंपरिक खेती लाभप्रद नहीं लगी। सरकार से प्रोत्साहन मिलने के बाद जैतून की खेती कर वह अब प्रगतिशील किसान बन गए हैं और इस साल 10 से 12 लाख रुपये के लाभ की उम्मीद करते हैं।
जयपुर, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत-पाकिस्तान सीमा से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के एक छोटे से गांव मदेरन के रहने वाले साहब राम सहारन को पारंपरिक खेती लाभप्रद नहीं लगी। सरकार से प्रोत्साहन मिलने के बाद जैतून की खेती कर वह अब प्रगतिशील किसान बन गए हैं और इस साल 10 से 12 लाख रुपये के लाभ की उम्मीद करते हैं।
साहब राम ने आईएएनएस से कहा, “कुछ साल पहले मुझको पता चला कि सरकार राज्य में जैतून की खेती को बढ़ावा दे रही है। हमने सरकार से जैतून के पौधे प्राप्त किए और साल 2013 में करीब दस हेक्टेयर भूमि में जैतून के 6700 पौधे लगाए। चौथे साल में फल निकलने शुरू हो गए हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “हम चौथे साल में प्रवेश कर गए हैं और अब अच्छी उपज की उम्मीद कर रहे हैं।”
आस्ट्रेलिया से पढ़कर आए साहब राम के भतीजे दीपक ने कहा, “हम प्रत्येक पौधे से 30 किलोग्राम फल की उम्मीद करते हैं। हमें कहा गया है कि सरकार हमसे जैतून खरीद लेगी। वे हमें जैतून के फल में तेल की मात्रा के अनुरूप भुगतान देंगे।”
साहब राम अकेले किसान नहीं हैं। श्रीगंगानगर, बीकानेर, जयपुर और नागौर के अनेक किसानों ने अच्छे लाभ के लिए पारंपरिक खेती की जगह जैतून जैसी नगदी फसल शुरू कर खेती में विविधता लाई है।
साहब राम जैसे किसानों की नजर अब देश में बड़े पैमाने पर जैतून की खेती पर है। जैतून के लिए अभी तक देश इजरायल, तुर्की, इटली, पुर्तगाल और जॉर्डन पर निर्भर है।
राजस्थान के कृषि मंत्री प्रभु लाल सैनी ने कहा कि किसान तेजी से खेती में विविधता ला रहे हैं और जैतून की खेती को चुन रहे हैं।
राज्य के बागवानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इजरायल की तकनीकी सहयोग से राजस्थान सरकार ने साल 2008 में जैतून खेती परियोजना शुरू की थी। राज्य सरकार ने सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत राजस्थान जैतून खेती लिमिटेड (आरओसीएल) का गठन किया था।
आरओसीएल के मुख्य संचालन अधिकारी योगेश वर्मा ने कहा कि फिलहाल राज्य में जैतून की खेती 800 हेक्टेयर भूमि में होती है जिसमें 182 हेक्टेयर सरकारी भूमि है।
उन्होंने आगे कहा कि जैतून की खेती के लिए शीत और ग्रीष्म काल में सापेक्षिक रूप से पर्याप्त ठंडे और शुष्क जलवायु चाहिए। जैतून के प्रत्येक पौधे को प्रतिदिन 10 से 15 लीटर पानी की जरूरत होती है।
वर्मा ने कहा कि जैतून की खेती के लिए राजस्थान की जलवायु अनुकूल है, यहां ठंड के मौसम में तापमान 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जबकि गर्मी में 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
राजस्थान सरकार जैतून की खेती के लिए नवजात पौधों, उर्वरक और टपक सिंचाई प्रणाली की खरीद पर सब्सिडी देती है।
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