नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के ऊपरी सदन ने बुधवार को भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर आजादी के संघर्ष में लाखों वीरों के बलिदान का याद किया और भारत को मजबूत, आत्मनिर्भर व धर्मनिरपेक्ष बनाने का संकल्प लिया।
सभापति हामिद अंसारी ने संकल्प पढ़ा, इसके बाद सदन ने सर्वसम्मति से इसे अपनाया।
अंसारी ने संकल्प पढ़ते हुए कहा, “यह सदन 75 साल पहले महात्मा गांधी के ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ के आह्वान को याद करता है, जिसमें उन्होंने भारतीय लोगों से ब्रिटिश शासन को खत्म करने के लिए ‘करो या मरो’ का नारा दिया था।”
उन्होंने कहा, “यह सदन भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर भारतीय लोगों, छात्रों, किसानों, महिला श्रमिकों और सरकारी अधिकारियों वीरता भरे संघर्ष को याद करता है, जिन्होंने ब्रिटिश राज के क्रूर दमन का विरोध करने के लिए सत्याग्रह किया जिसने ब्रिटिश राज की नींव हिला दी।”
सभापति ने कहा, “यह हमारे लाखों लोगों के बलिदान व हजारों भारतीयों को सलाम करने का व आभार प्रकट करने का अवसर है, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।”
अंसारी ने कहा, “इस दिन पर सदन स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों व आदर्शो को बनाए रखने और इसकी रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और भारत को मजबूत, आत्मनिर्भर, समावेशी, धर्मनिरपेक्ष व लोकतांत्रिक बनाने के लिए स्वयं को समर्पित करते हैं।”
सदन के सदस्यों ने मेज थपथपाकर सर्वसम्मति से संकल्प को स्वीकार किया।
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