मुंबई, 23 मार्च (आईएएनएस)। आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकवादी से सरकारी गवाह बने पाकिस्तानी-अमेरिकी डेविड कोलमैन हेडली ने बुधवार को दावा किया कि उसका साथी तहव्वुर राणा उसके लश्कर से संबंध के खिलाफ था।
मुंबई, 23 मार्च (आईएएनएस)। आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकवादी से सरकारी गवाह बने पाकिस्तानी-अमेरिकी डेविड कोलमैन हेडली ने बुधवार को दावा किया कि उसका साथी तहव्वुर राणा उसके लश्कर से संबंध के खिलाफ था।
हेडली ने कहा कि अमेरिका के शिकागो में एक आव्रजन परामर्श संस्था चलाने वाले पाकिस्तानी नागरिक राणा को पता था कि वह एलईटी के लिए काम करता था।
एक अन्य कथित एलईटी आतंकवादी अबु जुंदाल के वकील अब्दुल वहाब खान अमेरिका की एक जेल में कैद हेडली से वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए जिरह कर रहे थे। इसी दौरान यह खुलासा हुआ।
हेडली ने खान को बताया, “राणा को एलईटी से मेरे संबंध के बारे में जानकारी थी और मैंने उसे एलईटी द्वारा मुझे दिए गए प्रशिक्षण के बारे में बताया था। मैंने राणा को यह भी बताया कि मैं एलईटी के लिए जासूसी कर रहा था। यह 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले से लगभग चार-पांच महीने पहले की बात है।”
हेडली ने कहा, “राणा ने एलईटी से मेरे संबंध का विरोध किया था। उसने मुझे मुंबई के अपने कार्यालय का इस्तेमाल न करने को कहा। मैंने उसकी आपत्तियों को स्वीकार करते हुए जुलाई 2008 में कार्यालय बंद करने के लिए कदम उठाए थे।”
खान द्वारा उनकी व्यावसायिक गतिविधियों और उनसे होने वाली आय के बारे में पूछे जाने पर हेडली ने कहा कि उसने संयुक्त अरब अमीरात में चार-पांच दुकानें खरीद कर उसमें निवेश किया था।
उससे यह पूछा गया कि क्या एलईटी विभिन्न गतिविधियों के लिए उसे धन मुहैया कराता था, उसने कहा कि वह आतंकवादी संगठन को वित्तीय सहायता देता था।
यह पूछे जाने पर कि क्या उसके धन का प्रयोग आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाता था, उसने अदालत को बताया, “कई चीजों के लिए इसका प्रयोग किया जाता था। मैं एलईटी को लगभग 60-70 लाख पाकिस्तानी रुपये दान में दे चुका हूं। मैंने अंतिम बार 2010 में पैसे दिए थे।”
हालांकि हेडली ने अपनी पत्नी शाजिया के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब देने से इंकार कर दिया। शाजिया अब भी कानूनी रूप से उसकी पत्नी है।
खान ने इसके बाद भी शाजिया के बारे में सवाल पूछना जारी रखा, जिस पर विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने आपत्ति की और कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 122 के तहत पत्नी और पति के बीच की बातों का खुलासा किया जाना जरूरी नहीं है।
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