देहरादून, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। जाने-माने साहित्यकार किरन नागरकर ने कहा है कि वह राष्ट्रवाद को जरा भी तवज्जो नहीं देते और इसके बावजूद खुद के भारतीय होने पर उन्हें गर्व है।
देहरादून में आयोजित साहित्य महोत्सव के आखिरी दिन ‘डिजिटल भारत में राष्ट्रवाद’ विषय पर केंद्रित सत्र के दौरान नागरकर ने ये बातें कहीं।
इस सत्र में नागरकर के अलावा प्रतिष्ठित साहित्यकार नयनतारा सहगल, नंदिता हक्सर और हर्ष मंदर भी शामिल थे। जानी-मानी पत्रकार राणा अय्यूब ने इस सत्र का संचालन किया।
दर्शकों से खचाखच भरे हॉल में सत्र को संबोधित करते हुए नागरकर ने कहा, “मुझे भारतीय होने पर गर्व है, लेकिन राष्ट्रवाद पर मैं लानत भेजता हूं। मैं नहीं चाहता कि भारत एक महान देश बने। इसके बजाय मैं चाहता हूं कि भारत एक अच्छा देश बने, जहां सभी को प्यार और सम्मान मिले और जहां सभी लोगों के अधिकार सुरक्षित हों।”
देश की मौजूदा सरकार को देशवासियों के बीच नफरत फैलाने का जिम्मेदार ठहराते हुए नागरकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सवालों से नफरत करती है।
उन्होंने कहा, “मौजूदा सरकार पूरे देश में नफरत ही फैला रही है। वे घृणा और नफरत का बीच बो रहे हैं।”
नागरकर आजादी के बाद की पीढ़ी के सर्वाधिक सराहे गए लेखकों में हैं। उपन्यास के अलावा उन्होंने नाटक भी लिखे हैं तथा मराठी और अंग्रेजी में फिल्म और नाटक की समालोचना भी करते रहे हैं।
नागरकर को उनकी 1997 की रचना ‘ककोल्ड’ के लिए प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी अवार्ड से नवाजा जा चुका है।
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