अगरतला, 2 सितम्बर (आईएएनएस)। राजग सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ 10 केंद्रीय श्रमिक संघों द्वारा शुक्रवार को आहूत 12 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल से त्रिपुरा में जनजीवन पंगु-सा हो गया है।
दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान, बाजार, बैंक और वित्तीय संस्थान, सरकारी कार्यालय एवं शिक्षण संस्थान बंद हैं और सड़कों पर वाहन दिखाई नहीं दे रहे हैं।
पुलिस प्रवक्ता उत्तम भौमिक ने कहा, “राज्य में कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।”
अगरतला और धर्मनगर रेलवे स्टेशनों पर बंद समर्थकों के धरने के कारण राज्य में तथा अन्य राज्यों के साथ रेल सेवाएं बाधित हुई हैं।
बांग्लादेश की सीमा पर सीमा शुल्क केंद्रों में श्रमिकों की अनुपस्थिति के कारण त्रिपुरा और बांग्लादेश के बीच व्यापार प्रभावित हुआ है।
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) की त्रिपुरा इकाई के अध्यक्ष माणिक डे ने कहा, “यह पूर्ण और सफल हड़ताल है। समाज के हर वर्ग के लोगों ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ स्वत: हड़ताल का समर्थन किया है और वेतन बढ़ाने की मांग की है।”
त्रिपुरा में सत्तासीन मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाली वाममोर्चा सरकार हड़ताल की समर्थक है। यह हड़ताल 10 केंद्रीय श्रम संघों ने अपनी 12 सूत्री मांगों के समर्थन में केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए आहूत किया है।
माकपा से संबद्ध सीटू और कांग्रेस से संबद्ध इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन (इंटक) हड़ताल का आह्वान करने वाले 10 श्रमिक संघों में शामिल हैं।
हालांकि भाजपा से संबद्ध श्रमिक संघ ने हड़ताल को अनावश्यक बताया है और लोगों से इसे खारिज करने को कहा है।
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