नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। पहला राष्ट्रीय जनजातीय कॉर्निवल नई दिल्ली में 29 अप्रैल से होगा। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री करेंगे। यह जानकारी शुक्रवार को नई दिल्ली में जनजातीय मामलों के मंत्री जुआल ओराम ने दी।
ओराम राज्यों के जनजातीय कल्याण मंत्रियों/ प्रधान सचिवो/सचिवों के सम्मेलन का उद्घाटन कर रहे थे। यह सम्मेलन जनजातीय समुदाय के समग्र विकास के लिए रणनीति तैयार करने के बारे में आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि इस कॉर्निवल का उद्देश्य बड़े पैमाने पर जनजातीय संस्कृति के विभिन्न पक्षों को दिखाना और बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि उद्देश्य जनजातीय जीवन के विभिन्न पक्षों जैसे संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज और जनजातीय समुदाय के कौशल को संरक्षित करना और प्रोत्साहित करना है ताकि जनजातीय समुदाय की क्षमता का उपयोग उनके समग्र विकास के लिए किया जा सके।
उन्होंने कहा कि चार दिन के कॉर्निवल में प्रलेखित परंपरागत, सामाजिक-सांस्कृतिक पक्षों, जनजातीय कलाओं का प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद, चित्रकारी और पारंपरिक रोग निदान व्यवहारों को प्रदर्शित करना है। उन्होंने कहा कि कॉर्निवल में जनजातीय समुदाय के स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और संस्कृति के बारे में पैनल संवाद का आयोजन भी किया जायेगा।
जनजातीय लोगों में खून की कमी पर चिंता करते हुए ओराम ने कहा कि उनके मंत्रालय ने इस संबंध में विभिन्न राज्यों में कार्यशालाओं का आयोजन किया है। यह पता लगाया जा रहा है कि देश के किन किन क्षेत्रों में जनजातीय लोगों में खून की कमी है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी राज्यों ने इस काम को पूरा कर लिया है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे इस संबंध में निकले नतीजों को जल्दी से जल्दी केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय से साझा करें ताकि इस प्रकोप से निपटने की रणनीति बनाई जा सके।
जनजातीय मामलों के मंत्री ने कहा कि अनुसूचित जनजाति के लोगो में बेरोजगारी की समस्या गंभीर है। उन्होंने कहा कि कृषि को टिकाऊ और कमाई के लायक बनाना आवश्यक है ताकि जनजातीय लोगों को सार्थक रोजगार मिल सके। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति के किसानों को संबंधित व्यवसायों जैसे डेयरी, बागवानी, फूल की खेती, मछलीपालन और मुगीर्पालन में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
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