मुंबई, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रताड़ना और निष्कासन के कारण खुदकुशी कर चुके हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित शोधछात्र रोहित वेमुला की मां और भाई ने गुरुवार को बौद्ध धर्म अपना लिया। उनका कहना है कि अब ‘वे सचमुच शर्म से मुक्त हो गए हैं।’
वेमुला परिवार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के मौके पर हिंदू धर्म छोड़ दिया। डॉ. अंबेडकर ने भी वर्ष 1956 में हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया था, क्यों? इसका जवाब हिंदू धर्म की राजनीति करने वाले और धर्म को सीढ़ी बनाकर सत्ता तक पहुंचने वालों के पास कोई जवाब नहीं है। वे तो अंबेडकर के प्रति अपनी श्रद्धा जताकर दलित वोट पाने के जुगाड़ में हैं।
रोहित के छोटे भाई राजा वेमुला ने एक संक्षिप्त समारोह के बाद कहा, “अगर मेरा भाई आज जीवित होता तो उसे हम पर गर्व होता।”
राजा ने कहा, “आज से मैं और मेरी मां वैसी जिंदगी जीएंगे, जिसकी कल्पना रोहित ने की थी। आज से मैं और मेरी मां सचमुच शर्म से मुक्त हो गए हैं।”
राजा वेमुला ने इस मौके पर अपने भाई की आत्महत्या को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी पर भी निशाना साधा।
रोहित के भाई ने हैदराबाद विश्वविद्यालय के कुलपति पी. अप्पा राव का जिक्र करते हुए कहा, “मोदी उसकी (रोहित वेमुला) मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर कुछ भी नहीं कहते। वह मेरे भाई की मौत पर आंसू बहाते हैं, लेकिन उन्होंने अप्पा राव के बारे में कुछ नहीं कहा।”
ज्ञात हो कि रोहित वेमुला ने हैदराबाद विश्वविद्यालय में जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हुए फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
राजा वेमुला ने कहा कि दलित नेता बी.आर. अंबेडकर की जयंती के अवसर पर हिंदू धर्म को अस्वीकार करके उन्होंने हिंदू जाति प्रथा को अस्वीकार कर दिया है। राजा ने आरोप लगाया कि हिंदू धर्म दलितों के उत्पीड़न की अनुमति देता है और केंद्र की सत्ता में बैठे लोग इसी धर्म की राजनीति करने में मशगूल हैं।
विश्वविद्यालय के छात्र रोहित की आत्महत्या के मामले में कुलपति अप्पा राव के निलंबन और केंद्रीय मंत्रियों बंडारू दत्तात्रेय और स्मृति ईरानी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जो लगातार अनसुनी की जा रही है।
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