मिशन के ’11वें डाइवर्सिटी डे’ कार्यक्रम में संस्थापक अध्यक्ष एचएल दुसाध की छह किताबों का विमोचन किया गया। इनमें तीन किताबें रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या को लेकर हैं। मिशन के अध्यक्ष दुसाध ने शैक्षणिक परिसरों में फैले भेदभाव को रोहित वेमुला की आत्महत्या कारण बताया। उन्होंने कहा, “शिक्षा जगत में एक विशेष वर्ग के वर्चस्व को खत्म किए बिना शिक्षा में दलित पिछड़ों के पठन-पाठन का उचित माहौल नहीं तैयार किया जा सकता। एजुकेशन में डायवर्सिटी का मतलब देश के सभी प्रमुख शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और अध्यापन संख्या के अनुपात में देने को लेकर है।”
पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद ने कहा, “उच्च शिक्षा में गैरबराबरी के खात्मे का एक मात्र उपाय एजुकेशन डाइवर्सिटी है।” पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान ने एजुकेशन डायवर्सिटी की अलख जगाने की अपील की।
बुद्ध शरण हंस ने कहा कि जब अमेरिका में तमाम निजी स्कूलों और विश्वविद्यालयों के प्रवेश में छात्रों को और शिक्षकों की भर्ती में डायवर्सिटी के तहत सभी को आरक्षण दिया जाता है, तो हमारे देश में क्यों नहीं दिया जा सकता।
बीएचयू के डॉ. ओम शंकर ने कहा, “उच्च शिक्षा में बहुजन को आउट करने की साजिश चल रही है। यदि हमारे छात्र और शिक्षक नहीं जागे, तो आने वाले दिनों में बहुजनों के लिए उच्च शिक्षा सपना होकर रह जाएगी। ऐसे में एजुकेशन डाइवर्सिटी आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
दिल्ली के हिन्दू कॉलेज के डॉ. रतनलाल ने कहा कि एजुकेशन में डायवर्सिटी की लड़ाई समय की मांग है। इसके लिए सतत प्रयास करना होगा। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ी चुनौती है।
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