नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। देशभर में दलितों पर हो रहे अत्याचार के मुद्दे पर लोकसभा में गुरुवार को नियम 193 के तहत चर्चा शुरू हुई।
केरल से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद पी.के.बीजू ने आरोप लगाया कि दलितों के खिलाफ अत्याचार की घटनाओं में वृद्धि हुई है और इस समुदाय के लोगों की शैक्षणिक व सामाजिक स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
भोजनावकाश के बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, संसदीय कार्य राज्य मंत्री एस.एस.अहलूवालिया ने उपाध्यक्ष एम.थंबीदुरई से मुद्दे को उठाने की मंजूरी मांगी।
केरल के अलाथुर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सदस्य बीजू ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि 37 फीसदी से अधिक दलित आबादी गरीबी रेखा ने नीचे जीवनयापन करती है और हर 18 मिनट पर एक दलित पर हमला होता है।
बीजू ने कहा, “देश के दलितों की सुरक्षा के लिए आपके पास पर्याप्त प्रावधान हैं, लेकिन हमारी सुरक्षा करेगा कौन।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोगों का सच्चा ‘संरक्षक’ बनकर उभरने की अपील की।
दलितों के बारे में दिए गए मोदी के हाल के बयान की ओर इशारा करते हुए माकपा सांसद ने कहा कि ऐसे बयान यह दर्शाते हैं कि दलितों पर हमला एक गंभीर मुद्दा है।
मोदी ने कहा था कि लोग दलितों पर हमला न करें। अगर उन्हें हमला करना ही है तो उनपर करें।
उन्होंने कहा कि गुजरात एक ‘समृद्ध राज्य’ है, फिर भी वहां के दलितों की हालत अच्छी नहीं है।
बीजू ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री से आग्रह करता हूं कि वह खुद को केवल बयान देने तक ही सीमित नहीं रखें, बल्कि कार्रवाई भी करें।”
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सांसद ने कहा कि दलितों के अधिकांश बच्चे पांच साल की आयु पूरा करने से पहले ही मर जाते हैं और दलितों में साक्षरता की दर 40 फीसदी से नीचे है।
उन्होंने कहा कि दलितों के खिलाफ अत्याचार व हिंसा की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए ‘राजनीतिक इच्छाशक्ति’ की जरूरत है।
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