दिल्ली– केन्द्रीय मंत्री “स्मृति जुबिन ईरानी” सदन में बोलीं और खूब बोलीं इसमें उनका अदाकारी का अनुभव सहायक हुआ.समर्थकों ने हमेशा की तरह तथ्यों को जाने बगैर खूब वाह-वाही की.लेकिन “द टेलीग्राफ” की सूक्ष्म पत्रकारिता ने इस अभिनय रुपी झूठ की धज्जियाँ उड़ा दीं. झूठ बोलो ,बार-बार बोलो और तेज आवाज में बोलो की तर्ज पर “आंटी नेशनल” की पदवी से नवाजी गयीं के अभिनय की सच्चाई प्रस्तुत है.
पहला उवाच स्मृति जुबिन ईरानी का – 11 फरवरी 2016 को इन्होने कहा था की जे एन यू के एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया था की उमर खालिद,कन्हैया और अनिर्बान भट्टाचार्य के साथ 4 अन्य छात्र 2 दिन पहले उस रैली में शामिल हुए.इन्होने कहा था की उक्त सुरक्षा अधिकारी का सरकार से कोई सम्बन्ध नहीं है.
द टेलीग्राफ– टेलीग्राफ ने लिखा की जे एन यू में प्राइवेट सुरक्षा कर्मीं नियुक्त हैं,जिन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन नियुक्त करता है.विश्वविद्यालय को अपनी स्वायत्तता बनाए रखने के लिए जद्दोजहद करने पड़ी.क्योंकि बिना प्रशासन की अनुमति के पुलिस अन्दर नहीं जा सकती थी.
दूसरा उवाच स्मृति जुबिन ईरानी का- ईरानी ने कहा था की विश्वविद्यालय की प्रोक्टर कमेटी ने प्रथम दृष्टया छात्रों को दोषी पाया था और छात्रों को निलंबित किया है.उन्होंने रोहित वेमुला मामले में कांग्रेस सांसद हनुमंता राव और केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय की चिट्ठी फॉरवर्ड करने की बात की थी.
द टेलीग्राफ– टेलीग्राफ़ ने बताया की कमेटी ने सूचना पाते ही छात्रों को निलंबित कर दिया था,और किसी भी प्रकार की सुनवाई के पहले ही.वहीँ रोहित मामले में एचआरडी मंत्रालय ने जो चिठ्ठिया फॉरवर्ड की थीं वे दोनों विरोधाभाषी थीं.एक और जहाँ कांग्रेस सांसद में हैदराबाद विश्वविद्यालय में दलित छात्रों की बढती आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के प्रयास के लिए चिट्ठी लिखी थी वहीँ केन्द्रीय मंत्री ने रोहित की पार्टी अम्बेडकर स्टूडेंट यूनियन को राष्ट्रविरोधी बताया था.
तीसरा उवाच स्मृति जुबिन ईरानी का– ईरानी ने कहा था की उन्होंने सभी सांसदों को जवाब दिया है जिन्होंने पत्र लिखा था.यह उन्होंने कांग्रेस सांसद हनुमंता राव द्वारा लिखे पत्र के हवाले के दौरान कहा था.ईरानी ने इन चिट्ठियों का हवाला उस चिठ्ठी के बचाव में दिया जिसे केन्द्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने रोहित वेमुला मामले में लिखी थी.
द टेलीग्राफ– दोनों चिठ्ठिया अलग विषयों पर थीं जिनमें से कांग्रेस सांसद के पत्र का जवाब विश्वविद्यालय प्रशासन ने नहीं दिया जबकि बंडारू की चिठ्ठी पर स्वयं एच आर डी मंत्रालय नजर बनाए हुए था.
चौथा उवाच स्मृति जुबिन ईरानी का– ईरानी ने कहा था की रोहित वेमुला और साथियों को हैदराबाद विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद् ने निलंबित किया था.
द टेलीग्राफ– कार्यकारी परिषद् ने रोहित एवं साथियों को सिर्फ होस्टल से निलंबित किया था.स्मृति एबीवीपी एवं एएसए के बीच हुए झगडे पर चुप्पी साधी रहीं.एबीवीपी के नेता ने पुलिस में शिकायत की थी की एएसए के छात्रों ने उससे मार-पीट की जबकि अस्पताल के रिकार्ड बताते हैं की वह चोट के इलाज के लिए नहीं अपितु प्रायर मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए अस्पताल गया था.
चौथा उवाच स्मृति जुबिन ईरानी का– ईरानी ने कहा की जेएनयू में महिषासुर दिवस मनाया गया जिसका वध माँ दुर्गा ने किया था ना जाने कोलकाता के लोग इसे कैसे सहन करेंगे.
द टेलीग्राफ-दक्षिण भारत में महिषासुर को मानने की प्रथा कई स्थानों पर है.महिषासुर को आर्यों और द्रविड़ों के बीच का रेखांकन माना जाता है.कर्नाटक में महिशुरु यानी महिषासुर का घर जिसे कन्नड़ भाषा में कहा और माना जाता है.
भारत वर्ष में असुर नाम की एक जाति है जो संरक्षित है जिनकी संख्या मात्र 9000 बची है.भारत में महिषासुर के कई पुरातन स्थान हैं जो पुरातत्व विभाग ने संरक्षित कर रखे हैं.महिषासुर दिवस सिर्फ जे एन यू में ही नहीं भारत में लगभग 350 स्थानों पर मनाया जाता है और पूजा जाता है.पुरातत्व विभाग ने इतिहास को समझने और संरक्षित करने के लिए महिषासुर के स्थानों को संरक्षित कर रखा है.
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