नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। लोकसभा और विधानसभा का चुनाव साथ-साथ कराने के मुद्दे पर राजनीतिक दल बंटे हुए हैं। ऐसी स्थिति में गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह (जीओएम) ने फिलहाल इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय नहीं लेने का फैसला किया है।
एक सरकारी सूत्र ने कहा, “राजनीतिक दलों में आम सहमति नहीं है। अकाली दल, असम गण परिषद (एजीपी) और अन्नाद्रमुक जैसे कुछ क्षेत्रीय दल जहां सैद्धांतिक रूप से इसके समर्थन में हैं, वहीं कांग्रेस एवं तृणमूल जैसी पार्टियों ने इसका विरोध किया है। कई दलों ने इस सुझाव को अव्यावहारिक बताया है।”
राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली इस समिति में कानून मंत्री डी. वी. सदानंद गौड़ा, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और प्रधानमंत्री कार्यालय और कार्मिक मामलों के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह भी शामिल हैं।
एक सूत्र ने कहा, “अभी तक जीओएम एक साथ चुनाव कराने का वादा करने को इच्छुक नहीं है। लेकिन, इस पर और बैठकें होने की उम्मीद है।”
पिछले साल दिसंबर में कानून एवं कार्मिक मामलों की संसद की स्थायी समिति ने संसद में एक रिपोर्ट पेश की थी जिसमें कहा गया था कि समिति को नहीं लगता कि निकट भविष्य में हर पांच साल में एक ही समय लोकसभा व विधानसभा के चुनाव नहीं हो सकते।
कांग्रेस सदस्य ई. एम. सुदर्शन नचियप्पन की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय कमेटी में तृणमूल कांग्रेस के सुखेन्दु शेखर राय, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और मनोनीत सदस्य के. टी. एस. तुलसी भी हैं।
इससे पहले इसी साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि देश भर में बार-बार होने वाले विधानसभा चुनाव अक्सर कल्याणकारी उपायों में बाधा डाले हैं।
मोदी के सुझाव को संवैधानिक विशेषज्ञों के एक हिस्से ने खारिज कर दिया है। वे महसूस करते हैं कि मोदी इस बात पर भरोसा कर रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में वह अपने समर्थक मतदाताओं को विधानसभा की लड़ाई में भी अपने पक्ष में कर लेंगे।
साथ-साथ चुनाव का पक्ष नहीं लेने वालों का मानना है कि इस तरह के कदम से संवैधानिक मानदंडों का उल्लंघन होगा और राज्यों की शक्ति और विधानसभा के अधिकारों का अतिक्रमण होगा। संविधान का अनुच्छेद 172(1) विधानसभाओं को यह अधिकार देता है कि यदि पहले भंग नहीं की गई हो तो हर पांच साल पर चुनाव कराए।
मुंबई स्थित आईडीएफसी इंस्टीट्यूट के एक स्वतंत्र अध्ययन में कहा गया है कि जब चुनाव साथ-साथ होंगे तो औसतन 77 फीसदी ऐसी संभावना रहेगी कि भारतीय मतदाता केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी को वोट देंगे।
सूत्रों ने कहा कि राजनाथ सिंह समिति नई इलेक्ट्रॉनिकवोटिंग मशीन (ईवीएम) खरीदने के चुनाव आयोग के प्रस्ताव की संस्तुति भी करेगी क्योंकि करीब नौ लाख ईवीएम ऐसी हैं जो अब काम में आने योग्य नहीं रह जाएंगी।
भारत सरकार के दो उपक्रम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड एवं इलेक्ट्रॉनिक कॉर्प ऑफ इंडिया लिमिटेड ईवीएम मुहैया कराते हैं।
dharmpath.com dharmpath