पटना, 25 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने गुरुवार को जातिवाद फैलाने के विपक्षियों के आरोप पर तंज कसते हुए सवाल उठाया कि वंचितों और उत्पीड़ितों को मुख्यधारा में लाना क्या जातिवाद है?
राजद प्रमुख ने सोशल साइट फेसबुक के अपने वॉल पर लिखा, “अगर सदियों से चली आ रही जाति के आधार पर भेदभाव मिटाना, वंचितों और उत्पीड़ितों को मुख्यधारा में लाना, जातिवाद को मिटाने के लिए प्रयास करना अगर जातिवाद है तो राजद का जातिवाद बढ़ाने में हाथ माना जा सकता है।”
उन्होंने आगे लिखा कि इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि बिहार में राजद के शासनकाल से पहले पिछड़े और दलित किस सीमा तक जातिगत भेदभाव से व्यथित थे, कैसे समाज के हर पहलू में उन्हें तिरस्कार और वैमनस्य का सामना करना पड़ता था।
लालू ने लिखा, “मैंने उन्हें (वंचितों और उत्पीड़ितों) को जगाने का काम किया, उन्हें उनके अधिकारों से अवगत करवाया और बराबरी का अहसास करवाया, ताकि वे आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के साथ समाज में अपना उपयुक्त स्थान बना सकें।”
राजद प्रमुख ने विपक्षियों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन कदमों से सिर्फ उन्हीं को आपत्ति हो सकती है, जिन्हें लोकतंत्र में एक बड़ी आबादी के दबे या हाशिये पर पड़े रहने से निजी लाभ पहुंचता है।
उल्लेखनीय है राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नेताओं ने लालू पर जातिवाद करने का आरोप लगाया है।
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