नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली सरकार से कहा कि वह वकीलों को राजधानी में लागू सम विषम परिवहन योजना से छूट देने की किसी संभावना पर विचार करे।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.रोहिणी तथा न्यायमूर्ति जयंत नाथ की पीठ ने कहा, “दिल्ली सरकार सम-विषम परिवहन योजना के बाकी समय के लिए वकीलों को राजधानी में योजना से छूट देने की किसी संभावना पर विचार करे।”
पीठ ने कहा कि यह योजना दिल्ली सरकार का नीति संबंधी फैसला है। यह दो सप्ताह के लिए लागू है तथा स्थायी योजना नहीं है।
दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ स्थायी वकील राहुल मेहरा ने न्यायालय से कहा कि योजना के खत्म होने में केवल चार दिन बचे हैं। पहला चरण ठंड के मौसम में, जबकि दूसरा चरण गर्मी के मौसम में लागू हुआ है।
दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव खोसला द्वारा दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि दो सप्ताह लंबी समय-विषम परिवहन योजना मनमाना, अवैध, अनुचित तथा संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
उन्होंने मोटर वाहन अधिनियम में बिना संशोधन किए योजना का उल्लंघन करने वाले लोगों पर दो हजार रुपये के जुर्माने को भी चुनौती दी।
याचिका में कहा गया कि अधिसूचना कानूनी महकमे को दिल्ली के विभिन्न न्यायालयों व न्यायाधिकरणों में उसका काम करने में बाधा पैदा कर रही है।
खोसला ने कहा, “यह बात स्पष्ट है कि इस नीति को बिना सोचे-विचारे जल्दबाजी में पारित किया गया है।”
उन्होंने कहा कि वकीलों को इस योजना से छूट मिलनी चाहिए, क्योंकि वे व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में अदालतों की सहायता करते हैं।
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