नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय गुरुवार को एक याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें मवेशी बाजार में वध के लिए पशुओं की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने वाली केंद्र सरकार की अधिसूचना को व्यापार की स्वतंत्रता का अधिकार के तहत चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता मोहम्मद फहीम कुरैशी ने पशु क्रूरता रोकथाम (जब्त पशुओं की देखभाल तथा इलाज) कानून, 2017 को भी चुनौती दी है।
हैदराबाद निवासी याचिकाकर्ता के वकील सनोबर अली कुरैशी ने बीते सात जून को न्यायालय से मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध किया तो न्यायमूर्ति अशोक भूषण तथा न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अवकाश पीठ ने मामले की सुनवाई करने के लिए 15 जून की तारीख तय की।
पेशे से वकील फहीम कुरैशी ने दलील दी है कि पशु क्रूरता रोकथाम (मवेशी बाजार विनियमन) कानून, 2017 तथा पशु क्रूरता रोकथाम (जब्त पशुओं की देखभाल तथा इलाज) कानून, 2017 मनमाना, अवैध तथा असंवैधानिक है।
उन्होंने कहा कि ये कानून संविधान द्वारा दिए गए किसी भी पेशे के अधिकार, जीवन का संरक्षण व व्यक्तिगत स्वतंत्रता, विवेक व स्वतंत्र पेशे की स्वतंत्रता, धर्म का पालन तथा उसके प्रसार तथा अल्पसंख्यकों के हितों के संरक्षण का हनन करते हैं।
याचिकाकर्ता ने 23 मई को जारी दोनों अधिसूचनाओं के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती दी है।
फहीम कुरैशी ने उस नियम पर सवाल उठाया है, जिसमें कम उम्र के मवेशियों को तब तक बाजार में नहीं बेचा जा सकता, जबतक कि खरीदार एक हलफनामा भरे, जिसमें वह बताए कि वह एक किसान है, मवेशी का केवल कृषि उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होगा और उसे छह महीनों तक नहीं बेचा जाएगा।
कुरैशी ने अधिसूचना के उस प्रावधान पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें मालिक को एक बॉण्ड भरना होगा, जिसके तहत वह मवेशी को ढोने, उसका रख-रखाव करने तथा इलाज के लिए खुद भुगतान करेगा।
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