नयी दिल्ली, 20 मई (आईएएनएस)। सेंटर फॉर एन्वॉयर्नमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) ने शुक्रवार को वायु प्रदूषण से निबटने के लिए ‘हेल्प दिल्ली ब्रीथ’ अभियान शुरू किया। इसे ऑटो रिक्शाचालकों की मदद से शुरू किया गया। इसका मकसद वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना और सोलर रूफटॉप प्रोग्राम के प्रति जनसमर्थन हासिल करना तथा सबों तक जागरूकता फैलाना है।
अभियान की शुरुआत राजधानी स्थित शिवाजी स्टेडियम में की गई।
इस मौके पर सीड के सीईओ रमापति कुमार ने कहा, “दिल्ली सरकार को शहर में वायु की गुणवत्ता में सुधार के लिए ज्यादा सस्टेनेबल स्टेप उठाते हुए लीडरशिप की भूमिका निभानी चाहिए। सरकार को सम-विषम योजना के लिए बधाई दी जानी चाहिए, लेकिन बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए हर तरफ से कोशिश और बराबरी के कदम उठाए जाने चाहिए।”
उन्होंने कहा, “दिल्ली सोलर रूफटॉप प्रोग्राम को अपना कर सालाना 20 लाख टन कार्बन डायक्साइड वायुमंडल में कम करने में सक्षम है। दिल्ली के पास पर्याप्त सौर बिजली उत्पादन की संभावना है और वह शहर की कुल छत जगह (रूफ स्पेस) का केवल 1.6 प्रतिशत का उपयोग करके दो गीगावाट तक की बिजली शहर में ही पैदा कर सकती है।”
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दो साल पहले की रपट में दिल्ली को दुनिया का सबसे प्रदूषित महानगर बताया था। हालांकि पहले की अपेक्षा अब थोड़ा बहुत सुधार हुआ है, पर डब्ल्यूएचओ की ताजा रपट के अनुसार दिल्ली की हवा में अभी भी तय मानकों से 12 गुना ज्यादा जहर घुला हुआ है और दुनिया भर के 3000 शहरों में दिल्ली का स्थान 11वां है।
आईआईटी कानपुर की एक रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में सड़क की धूल (35 प्रतिशत), वाहनों से पैदा प्रदूषण (25-36 प्रतिशत), थर्मल प्लांट व उद्योग (22 प्रतिशत) और जैव ईंधन/बायोमास के दहन (22 फीसदी) की प्रमुख भूमिका है।
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