नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। पेप्सी, रसना और मैगी नूडल्स सहित कई मशहूर विज्ञापन बना चुके एड गुरु प्रहलाद कक्कड़ का कहना है कि इन दिनों विज्ञापनों में सामाजिक व्याख्या शामिल होती है।
कक्कड़ ने आईएएनएस से कहा, “इन दिनों ये (विज्ञापन) सामाजिक व्याख्या पर केंद्रित होते हैं। ये बेहद प्रासंगिक हो गए हैं, क्योंकि लोगों को इस बात की चिंता है कि हमारा समाज किस ओर बढ़ रहा है।”
कक्कड़ ने कहा कि विज्ञापनों के लिए बड़े ब्रांड्स का सेलेब्रिटीज पर अत्यधिक निर्भर रहना नजरों में आने का एक आसान तरीका बन गया है।
25 सालों से भी ज्यादा समय से विज्ञापन जगत का हिस्सा रहे कक्कड़ ने कहा, “हर छोटा ब्रांड जिसके पास पैसा है, उसे लगता है कि उन्हें नजरों में आने के लिए आसान रास्ते की जरूरत है। इसलिए वे सेलेब्रिटीज की मदद लेते हैं। कुछ इनका सही प्रकार से उपयोग करते हैं, कुछ गलत प्रकार से।”
उन्होंने कहा, “लोग भूल जाते हैं कि आप एक ब्रांड के विज्ञापन के लिए सेलेब्रिटी की सेवा ले रहे हैं, इसके उलट नहीं।”
एड गुरु ने ब्रांड एंबेसेडर और ब्रांड के बीच फर्क रखने की जरूरत पर भी बल दिया।
पेप्सी के लिए ‘मेरा नंबर कब आएगा’ और मैगी के लिए ‘इट्स डिफरेंट’ अभियान की शुरुआत करने वाले कक्कड़ ने कहा, “नासमझ लोग विज्ञापनों से मूर्ख बन सकते हैं, क्योंकि यह मोटा बिल बनाने का आसान रास्ता है। (ब्रांड को)ब्रांड एंबेसेडर को दूसरे दर्जे पर रखना चाहिए और ब्रांड को पहले दर्जे पर। पटकथा भी बेहद चतुराई से लिखी जानी चाहिए। ब्रांड एंबेसेडर ब्रांड नहीं है।”
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